श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- शहडोल : सरकार हर साल स्कूल चलें हम का नारा और करोड़ों का बजट पेश करती है, लेकिन जमीन पर तस्वीर कुछ और ही है। जिले के बुढार विकासखंड के शासकीय माध्यमिक विद्यालय अतरिया में देश का भविष्य क्लासरूम में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मंच और सामुदायिक भवन में पढ़ने को मजबूर है। सबसे खतरनाक, बात यह कि जिस कमरे में बच्चे बैठकर पढ़ रहे हैं, उसी में गैस सिलेंडर रखकर मिड-डे मील भी बनाया जा रहा है।
कहने को स्कूल का भवन है, लेकिन वह पूरी तरह जर्जर हो चुका है। मजबूरी में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों की क्लास सामुदायिक भवन और खुले सांस्कृतिक मंच में लग रही हैं। जो बच्चे कमरे में जगह नहीं पाते उन्हें बाहर खुले मंच पर बिठाया जाता है।
इस मंच के ठीक बगल में एक गहरा खुला कुआं है। खेलते समय पैर फिसला तो अनहोनी भी हो सकती है। बरसात में फिसलन, जलभराव और खुले में पढ़ाई की दिक्कतें बच्चों की मुसीबत और बढ़ा रही हैं। अमरनाथ सिंह ने बताया कि जिले में 10 स्कूल निजी भवनों में चल रहे हैं और 15 नव-निर्मित भवनों में कक्षाएं लग रही हैं।







