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एमपी की वोटर लिस्ट में 58 लाख नामों का बड़ा अंतर; अब घर-घर पहुंचकर सत्यापन करेगा निर्वाचन आयोग

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श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :-   भोपाल। मध्य प्रदेश में आगामी नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायती राज चुनावों को निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। आयोग अपनी मतदाता सूची को पूरी तरह से अपडेट और शुद्ध करने की कवायद में जुट गया है। अब मैदानी स्तर पर जाकर मौके पर सत्यापन की कार्रवाई भी की जाएगी।

 दरअसल, मौजूदा राज्य निर्वाचन आयोग और भारत निर्वाचन आयोग की वोटर लिस्ट के बीच प्रदेश में मतदाताओं की संख्या में एक बहुत बड़ा अंतर सामने आया है, जो करीब 58 लाख का है। इस भारी विसंगति को दूर करने के लिए अब राज्य निर्वाचन आयोग व्यापक स्तर पर परीक्षण और जांच की शुरुआत कर रहा है।

इस पूरी प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने के लिए राज्य निर्वाचन आयुक्त ने आगामी 29 जून को प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और उप जिला निर्वाचन अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली इस बैठक के लिए एक खास एजेंडा तय किया गया है, जिसके आधार पर ही पूरी वोटर लिस्ट का कड़ाई से परीक्षण किया जाएगा।

इन तीन मुख्य बिंदुओं के आधार पर होगा वोटर लिस्ट का परीक्षण
चुनाव आयोग ने इस गड़बड़ी और अंतर को ठीक करने के लिए तीन कड़े पैमाने तय किए हैं, जिनके आधार पर सूचियों को सुधारा जाएगा।
मतदाताओं की जांच और छंटनी: सूची में शामिल अनुपस्थित, शिफ्टेड, मृत और रिपीट यानी ‘एसडीआर’ श्रेणी के मतदाताओं की बारीकी से जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत जो वोटर मृत हो चुके हैं या अन्य स्थानों पर शिफ्ट हो गए हैं, उनके नाम सूची से पूरी तरह हटाए जाएंगे।
दोनों सूचियों का आपस में मिलान: भारत निर्वाचन आयोग की अंतिम प्रकाशित मतदाता सूची 2026 में दर्ज मतदाताओं की संख्या और राज्य निर्वाचन आयोग की वर्ष 2025 की मतदाता सूची में दर्ज मतदाताओं के आंकड़ों का गहन मिलान कर इस 58 लाख के अंतर की असल वजह तलाशी जाएगी।
मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन: भारत निर्वाचन आयोग के डेटा और राज्य निर्वाचन आयोग के मतदाताओं का न सिर्फ मिलान होगा, बल्कि मैदानी स्तर पर जाकर मौके पर सत्यापन की कार्रवाई भी की जाएगी ताकि कोई भी फर्जी या गलत एंट्री सूची में न बचे।
 क्यों जरूरी है यह कवायद
मध्य प्रदेश में होने वाले आगामी स्थानीय निकायों और पंचायतों के चुनावों का पूरा दारोमदार राज्य निर्वाचन आयोग की इसी वोटर लिस्ट पर टिका होता है। राज्य निर्वाचन आयोग अपनी सूची को अद्यतन (अपडेट) करने के लिए ही भारत निर्वाचन आयोग की वर्ष 2026 की सूची का सहारा ले रहा है।
इस शुद्धिकरण अभियान से जहां एक तरफ चुनावी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता आएगी, वहीं दूसरी तरफ 58 लाख के इस बड़े अंतर के पीछे छिपे तकनीकी या व्यावहारिक कारणों का भी खुलासा हो सकेगा।
Shreya News
Author: Shreya News

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