श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- रतलाम। पंचेड़-नामली मार्ग स्थित तुलसी वाटर पार्क में संचालित स्पा सेंटर की आड़ में अनैतिक देह व्यापार मामले की जांच सवालों के घेरे में है। जिस थाना प्रभारी अमित कोरी को शुरुआती कार्रवाई से दूर रखा और लापरवाही पर नोटिस दिया गया था, उसी को अब जांच की जिम्मेदारी सौंप दी। इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
बुधवार को आरोपी योगेश सिंह की अग्रिम व नरेश सिंह चौहान, भरत मेवाड़ा और दिलीप सिंह की नियमित जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दी गई हैं। पुलिस ने पांच जून को छापामारी कर इसका पर्दाफाश किया था।
कार्रवाई से पहले ही बंद करा दिया गया था दूसरा स्पा सेंटर
सूत्रों के अनुसार नामली में कार्रवाई से पहले आरोपियों द्वारा बड़बड़ रोड पर भी ‘व्हाइट रोज’ नाम से स्पा सेंटर संचालित किया जा रहा था, जहां थाईलैंड की युवतियों को बुलाया गया था। लेकिन इसे नामली स्थित तुलसी वाटर पार्क पर दबिश से पहले ही बंद करा दिया गया था।
मामले का महत्वपूर्ण पहलू मानव तस्करी और विदेशी नागरिकों की आवाजाही से जुड़ा है, लेकिन पांच दिन बाद भी जांच इस दिशा में अपेक्षित गति से आगे बढ़ती नहीं दिख रही।
थाई युवतियों के नेटवर्क और लोकल फैसिलिटेटर्स का नहीं चला पता
पुलिस अब तक स्पष्ट नहीं कर सकी कि तीनों थाई युवतियां जयपुर से रतलाम तक किस नेटवर्क के माध्यम से पहुंचीं और यहां उनकी व्यवस्था किसने की। जयपुर पुलिस से भी इस संबंध में पत्राचार नहीं किया गया। डीएसबी शाखा ने तीनों थाई युवतियों को डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए संबंधित विभागों को पत्र लिखा है।
स्पा सेंटर का एग्रीमेंट कराने वाला आरोपी योगेश सिंह फरार है। पुलिस उन स्थानीय फैसिलिटेटर्स तक भी नहीं पहुंच सकी, जिन्होंने कथित रूप से पूरे नेटवर्क को संचालित करने में भूमिका निभाई।
मामले पर पुलिस कप्तान का पक्ष (वर्जन)
“मामले की विवेचना अन्य अधिकारी को सौंपी जाएगी। सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच जारी है, तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी। सभी बिंदुओं को दिखवा रहे हैं।







