श्रेया न्यूज़ शहडोल द्रोपती धुर्वे :- शहडोलः कहते हैं कि होम्योपैथी दवा से धीरे-धीरे आराम होता है, इसके बावजूद जिले के 30 हजार लोगों ने बीते साल में होम्योपैथी चिकित्सा पर भरोसा जताते हुए अपना इलाज कराया है और इन्होंने पूरी तरह से इस चिकित्सा पर भरोसा जताते हुए इसी को अपनाने पर जोर दिया है। जिले में पांच स्थानों पर होम्योपैथी शासकीय अस्पताल संचालित हो रहे हैं। जिला मुख्यालय शहडोल के अलावा बुढार, धनपुरी, कोटा और जयसिंहनगर में यह अस्पताल संचालित हैं। इन सभी पांचों अस्पतालों में बीते साल यानी 2025-26 में 28 हजार 227 मरीजों ने अपना – इलाज कराया है। इसके पहले वर्ष 2024-25 में भी तकरीबन 30 हजार लोग इलाज कराने पहुंचे थे।
डा. अल्पना इरपाचे का कहना है कि होम्योपैथी चिकित्सा के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ रहा है और होम्योपैथी दवाईयों से रोगी ठीक हो रहे हैं। नागरिक अस्पताल के आयुष विभाग में स्थ होम्योपैथी क्लीनिक में प्रतिदिन काफी संख्या में रोगी उपचार करवाने पहुंच रहे हैं। होम्यापैथी चिकित्सक डा अल्पना ने बताया कि प्रति दिन 50 से 60 मरीज मुख्यालय के अस्पताल में आकर इलाज कराते हैं। वर्ष 2025-26 में शहडोल जिला मुख्यालय के क्लीनिक में 8 हजार से अधिक मरीज इलाज कराने पहुंचे हैं। होम्योपैथी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जो समरूपता के सिद्धांत पर आधारित है और बिना किसी साइड इफेक्ट के रोगों का उपचार कर सकती है। इस चिकित्सा के अनुसार रोग को अत्यंत निश्चयपूर्वक, जड़ से और सदा के लिए नष्ट और समाप्त किया जा सकता है, जो मानव शरीर में, रोग के लक्षणों से प्रबल और लक्षणों से अत्यंत मिलते जुलते सभी लक्षण उत्पन्न कर सके।
होम्योपैथी चिकित्सा -में चिकित्सक का मुख्य कार्य रोगी द्वारा बताए गए रोग लक्षणों को सुनकर उसी प्रकार के लक्षणों कों उत्पन्न करने वाली औषधि का चुनाव करना होता है। जिला आयुष अधिकारी डा शशिप्रभा पांडेय का कहना है कि होम्योपैथी चिकित्सा से गुर्दे की पत्थरी, चर्म रोग, फाइब्रो एडीनोमा, ब्रोनकाइटिस, अर्थराइटिस, बच्चों के व्यवहार संबंधी, मानसिक रोग, तनाव, अस्थमा, कोल्ड, फ्लू, हृदय की बीमारियों, गंजापन, दांतों की समस्याओं जैसी बीमारियों का थाइराइड, मूत्र रोग एवं संक्रमण तथा भी इलाज किया जा सकता है। होम्योपैथी एक सफल सुरक्षित एवं सुलभ पद्धति है। होम्योपैथिक दवाइयों व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर रोगों से लड़ने ताकत प्रदान करती है, जिससे बीमारी के दोबारा सै होने की संभावना बहुत कम होती है।










