श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- अनूपपुरःसामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा में भर्ती सरैया गांव निवासी शांति बाई केवट की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों और स्थानीय स्तर पर सामने आए आरोपों के अनुसार, मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे जिला चिकित्सालय रेफर किए जाने की आवश्यकता थी, लेकिन रेफरल प्रक्रिया और एम्बुलेंस की व्यवस्था के लिए परिजनों को कथित तौर पर दिनभर परेशान होना पड़ा।
आरोप है कि समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी और इसी दौरान मरीज की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि शांति बाई की हालत बिगड़ने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें उच्च उपचार के लिए रेफर करने की जरूरत बताई। इसके बाद स्वजन रेफरल प्रक्रिया पूरी कराने और मरीज को अनूपपुर ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था में लगे रहे।
परिजनों का आरोप है कि काफी समय बीतने के बावजूद एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। इसी बीच मरीज की हालत और बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। यदि स्वजनों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समय पर रेफरल, मरीज की निगरानी और अस्पतालों के बीच समन्वय की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होंगे। कोतमा प्रदेश सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल का गृह विधानसभा क्षेत्र है। ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गंभीर मरीज को समय पर रेफर कराने और परिवहन सुविधा नहीं मिलने की शिकायत ने स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकार लगातार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर यदि गंभीर मरीजों को रेफरल और एम्बुलेंस के लिए घंटों इंतजार करना पड़े तो व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि शांति बाई की मौत का वास्तविक कारण क्या था और इसमें एम्बुलेंस की अनुपलब्धता अथवा रेफरल में देरी की कितनी भूमिका रही, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।













