श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- बुढ़ार थाना क्षेत्र के बिरुहली गांव में फेसबुक पर अश्लील वीडियो अपलोड करने के मामले में पुलिस ने चार युवकों को गिरफ्तार किया है। साइबर सेल की तकनीकी जांच के बाद आरोपियों की पहचान हुई। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद चारों को जेल भेज दिया गया
शहडोल जिले में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री पोस्ट करने वालों पर पुलिस की नजर बनी हुई है। इसी क्रम में बुढ़ार थाना क्षेत्र में पुलिस ने फेसबुक पर अश्लील वीडियो अपलोड करने के मामले में चार युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, थाना प्रभारी रजनीश तिवारी ने सोशल मीडिया की निगरानी के दौरान आपत्तिजनक सामग्री देखी। इसके बाद साइबर सेल की मदद से पोस्ट अपलोड करने वालों की पहचान कर कार्रवाई की गई। चारों आरोपियों को तहसील न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
साइबर सेल की मदद से हुई आरोपियों की पहचान
मामला बुढ़ार थाना क्षेत्र के बिरुहली गांव का है। पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया निगरानी के दौरान फेसबुक पर अश्लील वीडियो अपलोड किए जाने की जानकारी सामने आई थी। थाना प्रभारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर सेल से संपर्क किया। साइबर टीम ने तकनीकी जांच के जरिए सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने वाले युवकों की पहचान की और इसकी जानकारी बुढ़ार पुलिस को दी।
जानकारी मिलने के बाद थाना प्रभारी रजनीश तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए बिरुहली निवासी सुमित केवट, सत्यम केवट, किशन लेवर और राहुल केवट को हिरासत में लिया। पूछताछ और जांच के बाद पुलिस ने मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की। इसके बाद चारों युवकों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
सोशल मीडिया पर पुलिस की निगरानी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। आपत्तिजनक, अश्लील या भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने के मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की है कि किसी भी अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री को अपलोड, शेयर अथवा प्रसारित न करें। पुलिस अधीक्षक संजय कुमार अग्रवाल के निर्देश पर जिले के थाना क्षेत्रों में सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखने के साथ साइबर सेल की मदद से संदिग्ध पोस्ट की जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सामग्री की प्रकृति और उसके संभावित कानूनी परिणामों का ध्यान रखना जरूरी है।













