श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- शहडोलः बिरसा मुंडा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को पद देने और विवाद बढ़ते ही बिना कारण बताए हटाने का ‘प्रभार का खेल’ सामने आया है। करीब 100 से अधिक शिकायतों के बाद कालेज प्रबंधन को अपना फैसला पलटना पड़ा है।
पूरा मामला नर्सिंग हे आफिसर को प्रभारी नर्सिंग अधीक्षक और प्रभारी मेट्रन बनाने का है। आरोप है कि दो जुलाई 2024 को जारी आदेश क्रमांक 1909 के तहत वरिष्ठता और योग्यता को नजरअंदाज कर जूनियर स्टाफ दीपा रोहाणी कनौजिया को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई थी।संयुक्त संचालक एवं अस्पताल अधीक्षक के 18 जुलाई 2024 के आदेश में स्पष्ट था कि अटेंडेंस, अवकाश, ड्यूटी रोस्टर, यूनिफार्म, स्टाफ मैनेजमेंट जैसे समस्त नर्सिंग कार्य प्रभारी नर्सिंग अधीक्षक दीपा रोहाणी कनौजिया द्वारा संपादित किए जाएंगे।
इस नियुक्ति के खिलाफ योग्य नर्सिंग स्टाफ ने अधिष्ठाता कार्यालय से लेकर उच्च स्तर तक करीब 100 शिकायतें भेजी थीं। आरोप लगा कि मरीजों की सुविधा छोड़कर संस्थान में सिर्फ सियासत हो रही है। विवाद बढ़ने पर अधिष्ठाता कार्यालय ने 30 जून 2026 को आदेश क्रमांक 5637 जारी कर दो जुलाई 2024 के आदेश को निरस्त कर दिया।
नए आदेश में कहा गया कि अब नर्सिंग आफिसर्स के नियंत्रण अधिकारी अस्पताल अधीक्षक एवं उप अस्पताल अधीक्षक होंगे। मगर इस आदेश में हटाई जा रहीं अधिकारी के नाम का उल्लेख तक नहीं किया गया। सवाल उठ रहा है कि यदि नियुक्ति गलत थी तो इतने लंबे समय तक काम क्यों कराया गया और अब बिना कारण हटाया क्यों जा रहा है। जांच प्रतिवेदन में क्या मिला, यह भी सार्वजनिक नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार कार्रवाई नियमों की बहाली कम, दो गुटों की लड़ाई का नतीजा ज्यादा है। जब तक मनमुताबिक काम हुआ, तब तक सब ठीक रहा।







