श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- उमरिया जिले के पाली नगर में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गुरुनानक होटल और वीनस होटल को सील कर दिया। एसडीएम मीनाक्षी बंजारे के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बाद पूरे नगर और आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया। कार्रवाई के दौरान नया बायपास स्थित राधा कुंज होटल के पास आनंद सिंह के घर पर भी छापामार कार्रवाई की गई। यहां लंबे समय से अवैध शराब बिक्री की शिकायतें मिल रही थीं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक पाली नगर में लंबे समय से खुलेआम शराब की पैकारी चल रही थी। बिना नंबर की गाड़ियों से दिनदहाड़े शराब की सप्लाई की जाती थी। यह अवैध कारोबार पाली से लेकर घुंघुटी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-43 किनारे मौजूद ढाबों और होटलों तक फैल चुका था। लोगों का कहना है कि इसके बावजूद आबकारी विभाग लगातार चुप्पी साधे रहा, जिससे अब विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
नगर में चर्चा है कि पूरा अवैध कारोबार मैनेजमेंट के दम पर चल रहा था। लोगों का आरोप है कि शराब कारोबारियों को संरक्षण मिलने के कारण ही कार्रवाई नहीं हो रही थी। छोटे दुकानदारों और ढाबों में खुलेआम शराब बेची जा रही थी, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने कभी सख्ती नहीं दिखाई। यही वजह है कि एसडीएम की कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग कटघरे में नजर आ रहा है।
युवाओं तक आसानी से पहुंच रही थी शराब स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर प्रशासन पहले ही सख्ती दिखाता तो अवैध शराब का नेटवर्क इतना मजबूत नहीं होता। क्षेत्र में युवाओं के बीच शराब की आसान उपलब्धता सामाजिक चिंता का बड़ा कारण बन चुकी थी। कई बार शिकायतें होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में यह धारणा मजबूत होती गई कि शराब ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से पूरा नेटवर्क संचालित हो रहा है।
लोगों ने की कार्रवाई की सराहना एसडीएम मीनाक्षी बंजारे की इस कार्रवाई की आम नागरिकों ने खुलकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि पहली बार किसी अधिकारी ने जमीन पर उतरकर अवैध शराब कारोबार पर सीधा प्रहार किया है। होटल सील होने के बाद अब अन्य अवैध कारोबारियों में भी डर का माहौल देखा जा रहा है।
आबकारी विभाग की भूमिका पर उठे बड़े सवाल अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब खुलेआम शराब की पैकारी हो रही थी, तब आबकारी विभाग आखिर क्या कर रहा था? लोग पूछ रहे हैं कि क्या विभागीय अधिकारियों को इस नेटवर्क की जानकारी नहीं थी या फिर सबकुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा था। प्रशासन की इस कार्रवाई ने शराब ठेकेदारों और आबकारी विभाग दोनों की कार्यशैली को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।







