श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- अनूपपुरः झूलसाने वाली गर्मी से सड़क पर चल रहा कोई राहगीर, घर पर रहने वाले लोग, मूक मवेशी, पक्षी यहां तक की अस्पताल में इलाज रत मरीज सभी बेहाल हैं। गर्मी से बचने के जतन सभी लोग अपने स्तर पर कर रहे हैं ताकि लू -लपट और गर्मी से होने वाली शारीरिक परेशानियों से बचा जा सके। अस्पताल में हर रोज बड़ी संख्या में मरीज बढ़ते तापमान में झुलस कर इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन यहां गर्मी से राहत पाने के इंतजाम न होने पर परेशान होते हुए इलाज करानी पड़ रही है।
हर माह करोड़ों रुपए का बजट एनआरएचएम के माध्यम से जिला अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं के नाम पर खर्च किए जा रहे हैं। गर्मी में मरीजों को परेशानी ना हो इसके लिए ठंडी हवा भर्ती कक्ष में बनी रहे। मरीज तपिश का सामना ना करें इसके लिए कूलर की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा कूलर के नाम पर केवल औपचारिकता निभा रहा है।
अधिकतर कूलर ओपीडी वार्ड में बंद अवस्था में हैं। एक दो. जो चल रहे हैं उनमें पानी नहीं भरा जाता। ऐसे में गर्म हवा फेंक रहे कूलर को बंद रखना ही मरीज उचित समझते। अस्पताल का पुरुष वार्ड हो या महिला वार्ड सभी जगह कूलर के नाम पर मनमानी की गई है। लापरवाही का आलम यह भी देखने को रहा बर्न वार्ड अस्पताल में नहीं है। पुराने महिला सिजेरियन प्रसव कक्ष में ही जले हुए मरीजों को रखा जा रहा है। यहां भी जगह की कमी होने के कारण जनरल वार्ड में सामान्य मरीजों के साथ रखकर उपचार किया जा रहा है। जिससे कमरे में संक्रमण फैल रहा इसकी कोई चिंता नहीं कर रहा है।
जबकि ऐसे मरीजों को वातानु कूलित कक्ष में रखा जाना चाहिए लेकिन अलग से वार्ड नहीं बनाया गया। लिहाजा ऐसे मरीजों को उपचार कराने में दिक्कत आ रही है। समय का मरीज ठीक नहीं हो पा रहे हैं बल्कि इससे गर्मी के मौसम में उनकी तकलीफ और बनी रहती है, संक्रमण भी फैल रहा। अस्पताल में यह स्थिति है कि जिस कक्ष में दस से अधिक पलंग है वहां मात्र एक कूलर रखा गया है जिससे पूरे कमरे में हवा नहीं जा पाती। अन्य मरीज पंखे के सहारे गर्मी से राहत पाने का प्रयास करते रहते हैं।
जबकि अस्पताल में हर वर्ष कूलर की खरीदी की जाती है। पुराने कूलर की ना तो मरम्मत कराई जा रही है ना उसका कोई लेखा-जोखा है कि वह आज कहां है और किस हालत में है जो की जांच का विषय है। बहरहाल जिला चिकित्सालय में मरीज अव्यवस्था के बीच तपिश झेलते हुए इलाज कराने को विवश है।









