श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- अनूपपुरः राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और आकांक्षा प्रोजेक्ट की टीम ने मुझे मेरे परिवार को अंधेरे से निकालकर आत्मनिर्भरता की रोशनी दी है। अब मैं अपना केवल अपने परिवार का सहारा ही नही हूं बल्कि समाज की सेवा भी कर पा रही हूं। यह कहना है सीआरपी सखी एवं डिजिटल सेवा प्रदाता आकांक्षा प्रोजेक्ट का लाभ लेकर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर दुलारी यादव का जो जनपद अनूपपुर के ग्राम छोहरी की निवासी हैं। गृहणी से डिजिटल सखी तक का सफर उन्होंने ऐसे ही नहीं तय किया बल्कि इसके लिए उन्होंने निष्ठा, समर्पण और अपना श्रम देकर अपनी पहचान स्थापित की है।
परिस्थिति जन्य स्थिति में उन्होंने बदलाव की राह चुनी दुलारी यादव को बंदनी स्व सहायता समूह से जुड़कर योजना सखी के बारे में जानकारी मिली 24 फरवरी को नजदीकी ग्राम फुनगा में आकांक्षा प्रोजेक्ट के यशवेंद्र सिंह से मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी घर में सिर्फ एक मोबाइल होने के बावजूद उन्होंने डिजिटल उद्यमी बनने का साहस दिखाया।
अनूपपुर में आयोजित सीएफआइजी के तहत डिजिटल ट्रेनिंग ली। फील्ड जाकर काम सीखा और जब भी जरूरत पड़ी गूगल मीट के माध्यम से आनलाइन ट्रेंनिंग के माध्यम से समस्याओं का तुरंत समाधान किया आज वे और उनके पति एक टीम की तरह गांव-गांव जाकर कैंप लगते हैं। अब अपने डिजिटल सेवा केंद्र के माध्यम से पैन कार्ड, ई-श्रम, आयुष्मान (आभा) संबल कार्ड, बैंक खाता खोलने और बिजली बिल जैसे काम कर रही हैं जिससे उन्हें आर्थिक मजबूती के साथ-साथ एनआरएलएम के सीआरपी सखी के रूप में 3 से 8 हजार मासिक की आमदनी हो रही है। उनकी सही कार्यशैली और ईमानदारी ने पहचान दिलाई है।







