श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- पं. एसएन शुक्ला विश्वविद्यालय में ‘आत्महत्या रोकथाम और चेतावनी संकेत’ विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में हाल ही में गठित ‘पीयर सपोर्ट ग्रुप’ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर रागनी लांबा ने कहा कि आत्महत्या जैसा गंभीर कदम नहीं उठाना चाहिए। समस्याओं का समाधान संभव है, इसलिए लोगों को खुलकर बात करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि आत्महत्या करने का प्रयास करने वाले व्यक्तियों के व्यवहार में अचानक बदलाव देखा जा सकता है, जैसे निराशावादी बातें करना और दूसरों से दूर रहना।
काउंसलर रागनी ने सुझाव दिया कि यदि कोई मित्र संकट में हो, तो बिना झिझक उसके साथ संवेदनशीलता से बात करें और मदद के लिए आगे आएं। विश्वविद्यालय ने छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए यह कार्यशाला आयोजित की।
यह कार्यक्रम सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय कार्यबल के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में मेंटल हेल्थ सेल और परामर्श केंद्र द्वारा आयोजित किया गया था। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों को आत्महत्या की रोकथाम के प्रति संवेदनशील बनाना और संकट में घिरे छात्रों की पहचान करना था।
छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. प्रमोद पांडे ने भी इस विषय पर अपने विचार साझा किए, जिसमें उन्होंने छात्रों पर अकादमिक दबाव की बात की और चेतावनी संकेतों की पहचान के महत्व को बताया।







