श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- बिरसिंहपुर पाली स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र में हादसे के दौरान घायल हुए 40 वर्षीय ठेका श्रमिक की इलाज के दौरान मौत हो गई। वे ओल्ड सीएचपी क्षेत्र में कन्वेयर पर काम करते समय नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र बिरसिंहपुर पाली में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एक दर्दनाक घटनाक्रम सामने आया है। प्लांट के ओल्ड सीएचपी क्षेत्र में नंबर-1 कन्वेयर से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए ठेका श्रमिक रामचरण कॉल की श्रीराम अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। इस घटना ने न केवल एक परिवार का सहारा छीन लिया, बल्कि बिजलीघर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार रामचरण कॉल (40 वर्ष), निवासी मालियागुड़ा, संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के अधीन कार्यरत ठेका कंपनी में मजदूरी करता था। सोमवार को वह ओल्ड सीएचपी क्षेत्र के नंबर-1 कन्वेयर पर काम कर रहा था। इसी दौरान अचानक नीचे गिर गया। हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं। तत्काल उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली पहुंचाया गया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे शहडोल रेफर कर दिया था। बाद में श्रीराम अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजनों के बयान ने बढ़ाई प्रबंधन की मुश्किलें
इस घटना का सबसे गंभीर पहलू परिजनों द्वारा दी गई जानकारी है। परिजनों के मुताबिक हादसे के समय रामचरण ने आवश्यक सुरक्षा उपकरण नहीं पहने हुए थे। यदि यह जानकारी जांच में सही साबित होती है तो यह औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक होगी। ऊंचाई पर काम करने वाले श्रमिक को सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट और अन्य जरूरी उपकरणों के बिना काम करने देना किसी भी स्थिति में सामान्य बात नहीं मानी जा सकती।
प्लांट में सेफ्टी ऑफिसर नवीन दुबे की जिम्मेदारी सुरक्षा मानकों के पालन और श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी से जुड़ी है। ऐसे में इस हादसे के बाद उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं मुख्य अभियंता एचके त्रिपाठी के नेतृत्व में संचालित प्रबंधन की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उत्पादन और तकनीकी कार्यों के साथ श्रमिकों की जिंदगी की सुरक्षा को प्राथमिकता देना प्रबंधन का महत्वपूर्ण दायित्व है।
मामले में त्रिभुवन सिंह की भूमिका और जिम्मेदारी भी जांच के दौरान स्पष्ट की जानी चाहिए। यदि वे संबंधित कार्य अथवा ठेका व्यवस्था और सुरक्षा निगरानी से जुड़े हैं तो उनकी जिम्मेदारी की भी समीक्षा होनी चाहिए। आखिर किस स्तर पर सुरक्षा इंतजामों में चूक हुई और किन परिस्थितियों में मजदूर जोखिम भरे स्थान पर काम कर रहा था, इसकी जांच आवश्यक है।
अब जवाब का इंतजार
रामचरण कोल की मौत ने औद्योगिक सुरक्षा के दावों की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब मामले में निष्पक्ष जांच, ठेका कंपनी की जवाबदेही और संबंधित अधिकारियों की भूमिका निर्धारित करना जरूरी है। साथ ही मृतक के परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता और अन्य पात्र सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
आखिर कब तक मजदूरों की जिंदगी जोखिम में डालकर काम कराया जाता रहेगा। क्या सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर करने के लिए किसी और बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा। संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र प्रबंधन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और इस मौत के लिए जिम्मेदारी तय करने की है।












