श्रेया न्यूज़ शहडोल द्रोपती धुर्वे :- सीधी। सीधी के गांवों में बुना जा रहा हुनर अब सरहदें लांघने लगा है। सिहावल विकासखंड के खोरबा टोला की पंजा दरी ने स्थानीय बाजार से निकलकर अमेरिकी बाजार तक दस्तक दे दी है। इनकी कीमत करीब 25 हजार रुपये प्रति दरी है। हाथों की महीन बुनाई, देसी कारीगरी और पर्यावरण के अनुकूल बनावट वाली इस दरी को पहली बार अमेरिका से आर्डर मिला है। फिलहाल पांच दरियां तैयार की जा रही हैं।
अब ग्लोबल बाजार की मांग पूरी करने की तैयारी में
आर्डर पूरा होते ही 150 मीटर दरी की अगली खेप तैयार करनी होगी। यानी गांव की चौपाल से शुरू हुआ कारोबार अब ग्लोबल बाजार की मांग पूरी करने की तैयारी में है।
कैसे बना लोकल फार ग्लोबल..
शहीद मोहम्मद बताते हैं कि पंजा दरी बनाना मेरा पुश्तैनी काम रहा है। करीब पचास साल पहले अपने दादा के साथ घर में पंजा दरी बनाना शुरू किया। इसका बड़े पैमाने में अपने घर में कारखाना बनाया है। जिसमें आठ से दस दरी एक साथ बन सकते हैं। गांव के अन्य लोग भी लूम बनाकर काम कर रहे हैं।
कड़ी मेहनत के बाद मूल्य नहीं
पहले दिन रात कड़ी मेहनत करने के बाद बाजार में मूल्य नहीं मिलता था। समय बीता आजीविका मिशन से जुड़कर सलमा स्व सहायता समूह बनाया। जिससे आर्थिक सहायता मिली। इसके बाद हर साइज डिजाइन और साइज की दरी, पूजा करने के लिए आसनी, जिला नाम लिख देना, कमल का निशान सहित बेहतर डिजाइन बनाकर काम शुरू किया।
आर्थिक स्थिति ठीक हुई
नतीजा यह रहा कि स्थानीय बाजार, रीवा, सतना, सिंगरौली, मैहर के बाजार में मांग बढ़ी। इसके साथ ही भोपाल, दिल्ली, इंदौर बैंगलोर, नर्मदापुरम में लगने वाले मेले में हाथों हाथ बिकना शुरू हो गया। जिससे आर्थिक स्थिति ठीक हुई।
अब फोन पर मिलते हैं ऑर्डर
जैलू निशा बताती है कि भोपाल, दिल्ली सहित जिन शहरों में मेला लगा चुके हैं। उन शहरों से फोन पर आर्डर मिलते हैं। उनके डिजाइन पर दरी बनाकर टांसपोर्ट के जरिए भेजते हैं। एडवांस पेमेंट पर ऑर्डर के काम किए जाते हैं।
कैसे पहुंच रहा अमेरिका
जमीर मोहम्मद बताते हैं कि उत्तर प्रदेश मिर्जापुर के एक निजी कंपनी के रंजीत मौर्या ने 5 दरी की डिजाइन भेजकर बनाने का आर्डर दिया है। यह आर्डर अमेरिका का है। जिसे ओबीटी कंपनी अमेरिका ले जाती है।
इन धागों का करते हैं उपयोग
बुनकर रघुवंश साकेत बताते हैं कि पंजा दरी बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के धागे का उपयोग बुनकर द्वारा किया जाता है। जिसमें शिल्क ,काटन, लीजी,तैल ऊन, बीकानेर ऊन, सुतली,सनिल, रेशम धागा का उपयोग किया जाता है। उत्तर प्रदेश के भदोही से धागा का उपयोग करते हैं। जिससे दरी मजबूत और टिकाऊ रहे। ग्राहक के इच्छानुसार भी डिजाइन बनाया जाता है।
सब्सिडी पर हो रही समस्या…
टैरिफ के कारण व्यापार में प्रभाव पड़ रहा है। पहले 13 प्रतिशत सब्सिडी मिलती थी। जिसमें अच्छा बचत हो जाता था। अब सरकार करीब तीन प्रतिशत दिया जा रहा है। जिससे नुकसान हो रहा है। अमेरिका से पांच दरी का आर्डर है। इसके साथ 150 मीटर का फिर ऑर्डर मिल चुका है।
रंजीत मौर्या , मिर्जापुर
डिजाइन समय पर निर्धारित
दरी की डिजाइन समय पर निर्धारित है। सामान्य दरी बनाने में करीब 5 दिन तो वही डिजाइन में 25-30 दिन का भी समय लग जाता है। दरी हर साइज में बनाया जाता है। उस हिसाब पर रेट तय किया जाता है।
सलमा स्व सहायता समूह द्वारा पंजा दरी लंबे समय से बनाया जा रहा है। यह मप्र विभिन्न जिलों मेले जाकर स्टाल लगाते है।
पुष्पेंद्र सिंह डीपीएम आजीविका मिशन सीधी












