श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- अनूपपुर। अमरकंटक के मां नर्मदा के उद्गम स्थल पर प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। वर्षों से मंदिर को चढ़ावे के रूप में नकदी, सोना-चांदी, आभूषण और अन्य बहुमूल्य संपत्तियां प्राप्त होती आई हैं। पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने इसी विषय को सार्वजनिक बहस का मुद्दा बनाते हुए कहा है कि यदि ट्रस्ट आर्थिक रूप से इतना सक्षम है तो अमरकंटक में मूलभूत सुविधाओं की कमी क्यों बनी हुई है।
ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था, निर्णय प्रक्रिया और विकास कार्यों का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि आस्था के साथ-साथ जवाबदेही भी बनी रहे। विधायक ने सवाल उठाया कि ट्रस्ट द्वारा आखिर किन प्रस्तावों पर निर्णय लिया जाता है और विकास योजनाओं की स्वीकृति किस प्रक्रिया से होती है, इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होती है। उन्होंने कहा कि यदि ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदशीं होगी तो अनावश्यक विवादों और आशंकाओं की गुंजाइश स्वतः समाप्त हो जाएगी।
सार्वजनिक विवरण जारी करने की मांग
विधायक फुंदेलाल सिंह मार्कों का कहना है कि नर्मदा मंदिर ट्रस्ट को वर्षों से करोड़ों रुपये का चढ़ावा, बहुमूल्य आभूषण, सोना-चांदी और अन्य चल-अचल संपत्तियां प्राप्त होती रही हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि ट्रस्ट समय-समय पर अपनी कुल संपत्ति और आय-व्यय का सार्वजनिक विवरण जारी करे। उनका मानना है कि धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता केवल आस्था से नहीं, बल्कि पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था से भी मजबूत होती है।
सुविधाओं का विस्तार प्राथमिकता
विधायक ने सवाल उठाया कि यदि ट्रस्ट के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं, तो अमरकंटक आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आज भी स्वच्छता, पार्किंग, पेयजल, शौचालय, आवास और यातायात जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ता है। उनका कहना है कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुविधाओं का विस्तार प्राथमिकता होनी चाहिए यदि विकास कार्यों पर खर्च हो रहा है, तो उसका प्रत्यक्ष प्रभाव दिखाई देना चाहिए।
श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा
विधायक ने कहा कि मां नर्मदा मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सभागीय आयुक्त (कमिश्नर) तथा सचिव कलेक्टर अनूपपुर हैं। ऐसे में ट्रस्ट की संपूर्ण चल-अचल संपत्ति, आय-व्यय, चढ़ावे और विकास कार्यों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा किसी भी प्रकार की शंका का स्वतः समाधान हो सकेगा।







