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15 दिन से जंगल में गुम रही थी कॉलर वाली बाघिन, 100 वर्ग KM की तलाश के बाद हाथियों ने खोज निकाला ठिकाना

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श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक जुलाई से लापता सिग्नल वाली कॉलरधारी मादा बाघिन आखिरकार सुरक्षित मिल गई। करीब 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में कई दिनों तक चले सघन सर्च ऑपरेशन के बाद वन विभाग ने हाथियों की मदद से उसे उसके होम रेंज में खोज निकाला।
उमरिया स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले कई दिनों से वन विभाग की सबसे बड़ी चिंता बनी कॉलर लगी मादा बाघिन आखिरकार सुरक्षित मिल गई। करीब दो सप्ताह पहले दोपहर दो बजे के बाद से बाघिन के जीपीएस और वीएचएफ रेडियो कॉलर से कोई सिग्नल नहीं मिल रहा था, जिससे आशंका बढ़ गई थी कि कहीं उसके साथ कोई अप्रिय घटना तो नहीं हुई। लगातार बारिश, घने जंगल और दुर्गम इलाकों के बीच लगभग 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में चले सघन खोज अभियान के बाद रविवार को हाथियों की मदद से बाघिन को उसके होम रेंज में सुरक्षित खोज लिया गया।
सिग्नल बंद होते ही शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन
वन विभाग के अनुसार जैसे ही बाघिन की लोकेशन मिलना बंद हुई, उसी दिन वन परिक्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में सुरक्षा श्रमिकों और बीट गार्डों की टीम ने जंगल में खोज अभियान शुरू कर दिया। पूरे दिन तलाश के बावजूद कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद अभियान का दायरा बढ़ाते हुए तीन अलग-अलग टीमें बनाई गईं, जिन्होंने लगातार कई दिनों तक जंगल के अलग-अलग हिस्सों में गश्त और सर्च ऑपरेशन जारी रखा।

बारिश बनी सबसे बड़ी चुनौती

लगातार हो रही बारिश ने वन अमले की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दीं। पगमार्क मिट जाते थे, रेडियो सिग्नल नहीं मिल रहे थे और कई इलाकों तक पहुंचना भी बेहद कठिन हो गया था। इसके बावजूद खोज अभियान एक दिन के लिए भी नहीं रोका गया। ग्रामीणों से मिलने वाली हर सूचना का विश्लेषण किया गया और संभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी गई।

15 दिन बाद सुरक्षित मिली कॉलर वाली बाघिन

हाथी, डॉग स्क्वाड और विशेषज्ञों की ली गई मदद

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक के मार्गदर्शन में विशेष खोज दल का गठन किया गया। इसमें बांधवगढ़ के वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर और वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (डब्ल्यूसीटी) के डॉ. प्रशांत देशमुख को शामिल किया गया। दो प्रशिक्षित हाथियों, उनके महावतों, डॉग स्क्वाड और अतिरिक्त वीएचएफ रिसीवर एंटीना की मदद ली गई। साथ ही संभावित स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए गए, हालांकि बाघिन उनमें कैद नहीं हो की।

पदचिन्ह बने सबसे बड़ा सुराग

लगातार प्रयासों के बाद खोजी दल को सबसे पहले बाघिन के ताजा पदचिन्ह मिले। इसके बाद हाथियों को उसी दिशा में भेजा गया और आखिरकार रविवार को कॉलर लगी मादा बाघिन अपने प्राकृतिक क्षेत्र में सुरक्षित दिखाई दी। वन विभाग ने उसके फोटो और वीडियो भी रिकॉर्ड किए। जांच में पता चला कि बाघिन पूरी तरह स्वस्थ है, लेकिन उसका रेडियो कॉलर पूरी तरह बंद हो चुका है।

अब भोपाल मुख्यालय से मिलेगा आगे का मार्गदर्शन
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले दस महीनों से बाघिन की सघन मॉनिटरिंग की जा रही थी। अब रेडियो कॉलर के निष्क्रिय हो जाने के बाद उसकी भविष्य की मॉनिटरिंग के लिए भोपाल मुख्यालय से आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त किया जाएगा। बाघिन के सुरक्षित मिलने से वन विभाग ने राहत की सांस ली है और यह अभियान टीमवर्क, धैर्य और वनकर्मियों की प्रतिबद्धता का उदाहरण बन गया है।

Shreya News
Author: Shreya News

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