श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- शहडोलः विकास के नाम पर शुरू हुआ शहडोल-रीवा राष्ट्रीय राजमार्ग के दूसरे चरण का काम आम जनता के लिए मुसीबत बन गया है। शहडोल से टेटका (जयसिंहनगर) तक 52 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर निर्माण कार्य के कारण पूरा इलाका धूल के गुबार में डूब गया है।
लगभग 164 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस सड़क के लिए 20 मीटर चौड़ा क्षेत्र चिन्हित है। इसमें 13 से 14 मीटर पर डामर की सड़क बनेगी और बाकी हिस्सा खाली रहेगा। निर्माण के लिए करीब 2400 पेड़ काटे जाने हैं, जिससे पर्यावरण को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। निर्माणाधीन सड़क की हालत बेहद खराब है।
जगह-जगह मिट्टी खुदी पड़ी है और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। भारी वाहनों के गुजरते ही धूल का ऐसा गुबार उठता है कि कुछ दिखाई नहीं देता। यह धूल सीधे लोगों की आंखों और फेफड़ों में जा रही है। आंखों में जलन, एलर्जी, खांसी और सांस की बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे और बुजुर्ग घर से बाहर निकलने में डरते हैं। बाइक सवार आए दिन फिसलकर चोट खा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव नहीं करा रहा। जबकि नियमानुसार निर्माण के दौरान रोज पानी डालना जरूरी है। निर्माण स्थल पर न चेतावनी बोर्ड हैं, न बैरिकेडिंग। इससे हादसों का खतरा हर समय बना है। पर्यावरण संरक्षण और जनसुरक्षा के सभी दिशा-निर्देशों की खुली अनदेखी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित विभाग के अधिकारी ठेकेदार की लापरवाही पर चुप हैं। निर्माण सामग्री खुले में पड़ी है और आवागमन सुचारु रखने का कोई इंतजाम नहीं है।
नतीजा, रोज हजारों लोग धूल और खतरे के बीच सफर करने को मजबूर हैं। लौगों ने प्रशासन से तत्काल जांच की मांग की है। उनकी मांग है कि रोज पानी का छिड़काव हो, धूल नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम हों और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि विकास जरूरी है, पर लोगों की सेहत् और जान की कीमत पर नहीं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह लापरवाही बड़ी समस्या बन जाएगी।







