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बीमार सिस्टम : गोदड़ी में बेटी का शव उठाकर ले गया पिता, नहीं मिला शव वाहन; अशोकनगर जिले में इंसानियत हुई शर्मसार

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  श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :-   अशोकनगर/बहादुरपुर। मध्य प्रदेश के बहादुरपुर में मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। भीषण गर्मी के बीच एक आदिवासी किशोरी का शव घंटों तक सड़क किनारे गुदड़ी में लिपटा पड़ा रहा। स्वजन शव को घर ले जाने के लिए पुलिस, 112 हेल्पलाइन और अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।

करीब साढ़े तीन घंटे इंतजार के बाद मजबूर परिजनों ने शव को खुद हाथों में उठाकर घर ले जाने का निर्णय लिया। वे अस्पताल से करीब 200 मीटर दूर तक शव ले भी गए, तभी स्थानीय लोगों को जानकारी लगी और एक कार की व्यवस्था कर शव को घर पहुंचाया गया।

पोस्टमार्टम के बाद नहीं मिली कोई सुविधा

जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम किशोरी का शव घर में फंदे पर लटका मिला था। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बहादुरपुर लाया गया। रात होने के कारण पोस्टमार्टम रविवार सुबह किया गया, लेकिन इसके बाद शव को घर पहुंचाने के लिए न तो वाहन उपलब्ध कराया गया और न ही अन्य कोई सहायता मिली। यहां तक कि शव को ढकने के लिए न तो कपड़ा मिला और न ही पॉलिथीन।

स्ट्रेचर और वार्ड बॉय तक नहीं मिला

स्जवनों का आरोप है कि पोस्टमार्टम के बाद शव को बाहर लाने के लिए अस्पताल की ओर से स्ट्रेचर या वार्ड बॉय तक उपलब्ध नहीं कराया गया। शव को ढंग से पैक भी नहीं किया गया, जिसके चलते पिता और भाई के साथ स्वजनों को ही हाथों से उठाकर बाहर लाना पड़ा।

 महिला पुलिसकर्मी नहीं थी मौजूद

मृतक किशोरी के भाई ने बताया कि घटना के बाद मौके पर केवल पुरुष पुलिसकर्मी पहुंचे थे। किशोरी के शव को लाने के दौरान कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। हालांकि रविवार सुबह पोस्टमार्टम के समय एसडीओपी मुंगावली अस्पताल पहुंचीं।

रातभर परिजनों ने की शव की रखवाली

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र परिसर में बने पोस्टमार्टम कक्ष की स्थिति भी बेहद खराब बताई जा रही है। कक्ष के आसपास गंदगी, कचरे के ढेर और नालियों का पानी जमा है। पुलिस ने शव को कक्ष में रखवा दिया, लेकिन सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की गई। परिजनों को पूरी रात जागकर चूहों और आवारा कुत्तो से शव की रखवाली करनी पड़ी।

Shreya News
Author: Shreya News

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