श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- धनपुरीः एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र अंतर्गत राजेंद्रा, खैरहा और बंगवार भूमिगत खदानों में कार्यरत जेएमएस प्राइवेट लिमिटेड एक बार फिर विवादों में घिर गई है। मजदूरों के वेतन से कथित कटौती और काम से बाहर करने के मामलों के बाद अब कंपनी पर अतिरिक्त समय तक काम करवाकर ओवरटाइम का भुगतान न करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह मामला न केवल श्रमिक अधिकारों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है, बल्कि पूरे तंत्र की निष्क्रियता को भी उजागर करता है।
श्रमिकों के अनुसार कंपनी में कार्य के दौरान बायोमैट्रिक सिस्टम के जरिए इन अटेंडेंस तो दर्ज कराया जाता है, लेकिन आउट अटेंडेंस जानबूझकर नहीं कराया जाता। आरोप है कि ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि मजदूरों से करवाए जा रहे अतिरिक्त समय को रिकॉर्ड में न दिखाया जाए और कंपनी – को ओवरटाइम का भुगतान न करना पड़े। यह सीधा सीधा श्रम कानूनों का के उल्लंघन और मजदूरों के अधिकारों का हनन है।
मजदूरों का कहना है कि उनसे निर्धारित समय से कहीं अधिक कार्य लिया जाता है, लेकिन उसके बदले उन्हें कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं दिया जाता। विरोध करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है, जिसके चलते श्रमिक डर के साए में चुप रहने को मजबूर हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि किस प्रकार श्रमिकों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनका शोषण किया जा रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब जेएमएस कंपनी पर ऐसे आरोप लगे हैं। इससे पहले भी मजदूरों के वेतन से आधी राशि वापस लेने और कार्य से बाहर करने जैसे मामले सामने आ चुके हैं, जो थाने तक पहुंच चुके हैं। बावजूद इसके, स्थिति में कोई सुधार नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। मजदूरों का कहना है कि उन्हें न तो पूरा वेतन दिया जाता है और न ही श्रम कानूनों के तहत अवकाश और स्वास्थ्य लाभ की सुविधा। विरोध करने पर काम से हटाने की धौंस दी जाती है।
इस संबंध में सहायक श्रमायुक्त केंद्रीय शहडोल राजेंद्र सिंह राजपूत से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।







