श्रेया न्यूज़ द्रोपती धुर्वे शहडोल :- बिरसिंहपुर पालीः प्रदेश सरकार द्वारा लगातार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे किये जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत मे कोई सुधार होता दिखाई नहीं दे रहा। ताजा मामला जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां पिछले करीब एक महीने से टाइफाइड जांच किट उपलब्ध नहीं है। बुखार से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, पर जांच के अभाव में उनका समुचित उपचार नहीं हो पा रहा। इस बारे में मिली जानकारी के अनुसार, कई मामलों मे डॉक्टर अनुमान के आधार पर दवाएं लिख रहे हैं, जबकि कुछ मरीजों को निजी पैथोलॉजी केंद्रों की ओर भेजा जा रहा है। बिना पुष्टि के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। सरकारी अस्पताल मे सामान्य जांच सुविधा का अभाव व्यवस्था की खामियों को उजागर कर रहा है।
सुविधाओं की कमीः जांच सुविधा ठप होने का सीधा असर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ रहा है। निजी लैब में जांच के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सामान्य बीमारी की जांच तक उपलब्ध नहीं है, तो बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे कितने सार्थक हैं। पाली के बीएमओ डॉ. पट्टू लाल सागर ने स्वीकार किया कि करीब एक माह से किट उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि किंट की मांग के लिए पत्राचार किया गया है, लेकिन जिला स्तर से आपूर्ति नहीं हो पाई। यानी प्रक्रिया कागजों में जारी है, जबकि मरीज परेशान हैं। लगातार समस्याएं: यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अस्पताल टिटनेस इंजेक्शन और अन्य जरूरी संसाधनों की कमी को लेकर चर्चा में रहा है।
हर बार मांग भेजी गई है का जवाब मिलता है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं इंतजार नहीं, उपलब्धता पर चलती हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण क्षेत्र की जनता का पहला सहारा होता है। यदि वहां बुनियादी जांच और आपातकालीन सेवाएं ही उपलब्ध न हों, तो लोगों का भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है। क्षेत्रवासियों ने अस्पताल में सभी आवश्यक जांच किट, इंजेक्शन और स्टाफ की नियमित उपलब्धता सुनिँश्चित करने की मांग की है।
नहीं मिलते डाक्टरः अस्पताल पर लापरवाही के कई आरोप लग रहे हैं। बीते दिनो पाली निवासी संजय कुमार गौतम अपनी गर्भवती पत्नी को तेज दर्द की स्थिति में अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन मौके पर कोई ड्यूटी डॉक्टर या स्टाफ मौजूद नहीं था। परिजनों के शोर मचाने के बाद स्टाफ बाहर आया। ड्यूटी डॉक्टर डॉ पवन दीपंकर को कई बार फोन किया गया, पर संपर्क नहीं हो सका। महिला की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने बीएमओ से संपर्क किया। उनके हस्तक्षेप के बाद, उपचार शुरू हुआ। इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।







