श्रेया न्यूज़ द्रोपती धुर्वे शहडोल :- जिले के नौरोजाबाद में एक रिटायर्ड शिक्षक के साथ हुई साइबर ठगी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगती। बात शुरू हुई संगीत के शौक से और खत्म हुई बैंक खाते से ढाई लाख रुपये गायब होने पर।
राजाराम चौहान ने चेन्नई की एक कंपनी से चार बांसुरियां मंगाई थीं। उम्र के इस पड़ाव पर उनका समय संगीत साधना में गुजरता था। ऑर्डर के बाद व्हाट्सएप पर रसीद आई, साथ में कूरियर का ट्रैकिंग नंबर भी। सब कुछ सामान्य दिख रहा था। कुछ दिन बाद जब उन्होंने पार्सल की स्थिति देखने के लिए लिंक खोला, तो वहां एक मोबाइल नंबर नजर आया। पार्सल की जानकारी लेने के लिए उन्होंने उस नंबर पर कॉल कर दिया। फोन उठाने वाले ने खुद को कूरियर से जुड़ा बताया और बड़ी सहजता से कहा कि पार्सल में दर्ज मोबाइल नंबर गलत है। नंबर ठीक कर देते हैं, बस एक छोटी सी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
यहीं से ठगी की कहानी शुरू हुई। ठग ने पहले नया मोबाइल नंबर लिया गया। फिर एक लिंक भेजा गया और कहा कि उस पर क्लिक कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी करनी है। बात इतनी सामान्य अंदाज में कही गई कि शक की कोई गुंजाइश नहीं बची। इसके बाद आरोपी ने एटीएम कार्ड की 16 अंकों की संख्या मांगी। फिर कार्ड के पीछे लिखा सीवीवी नंबर भी पूछ लिया। भरोसे में आए शिक्षक ने सारी जानकारी दे दी। उधर से आश्वासन मिला अब सब ठीक है, पार्सल समय पर मिल जाएगा। पार्सल सचमुच पोस्ट ऑफिस पहुंचा भी। शिक्षक ने राहत की सांस ली कि प्रक्रिया पूरी हो गई। लेकिन असली खेल तो पीछे चल रहा था।
कुछ समय बाद बैंक से फोन आया। बताया गया कि उनके खाते से ढाई लाख रुपये निकल चुके हैं। यह सुनते ही पैरों तले जमीन खिसक गई। तुरंत एटीएम ब्लॉक कराया गया लेकिन तब तक रकम साफ हो चुकी थी। परिवार ने फौरन साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। मामला थाना नौरोजाबाद और जिला साइबर सेल तक पहुंचा। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
थाना प्रभारी बालेंद्र शर्मा ने बताया कि यह साफ तौर पर फर्जी लिंक के जरिए की गई ठगी है। आरोपी ने भरोसा जीतकर बैंक और कार्ड की गोपनीय जानकारी हासिल की। उन्होंने लोगों से अपील की कि कोई भी अनजान लिंक न खोलें और एटीएम, सीवीवी या ओटीपी जैसी जानकारी किसी को न दें।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ठगों ने किसी तरह की हड़बड़ी नहीं दिखाई। उन्होंने धैर्य से बात की, भरोसा बनाया और फिर सही समय पर वार किया।
एक बांसुरी की धुन के इंतजार में बैठे शिक्षक को यह अंदाजा नहीं था कि डिजिटल दुनिया में छिपे जाल इतने खतरनाक हो सकते हैं। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि हर उस नागरिक के लिए चेतावनी है, जो ऑनलाइन सुविधा का इस्तेमाल करता है।







