श्रेया न्यूज़ द्रोपती धुर्वे शहडोल :- शहडोलः एंटीबायोटिक्स के उपयोग और उससे होने वाले फायदे व नुकसान के बारे में जागरूकता लाने के उद्देश्य से संभागीय मुख्यालय के आइजीएम इंस्टीट्यूट आफ आइटी मैनेजमेंट कालेज पांडवनगर में एक सेमिनार हुआ और जिसमें विद्यार्थियों ने हिस्सा लेते हुए एंटीबायोटिक के बारे में जाना और अपनी जिज्ञासा का विशेषज्ञों से समाधान किया। साथ यह शपथ लिया कि वे ऐटीबायोटिक्स का उपयोग डाक्टरों की सलाह पर ही करेंगे। साथ अपने आसपास व समाज के लोगों को जागरूक करेंगे कि वे’ बिना डाक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक्स का उपयोग न करें।
जिला अस्पताल के डा. पुनीत श्रीवास्तव ने बताया कि एंटीबायोटिक का उपयोग हर बीमारी में नहीं करना चाहिए और बिना डाक्टर की सलाह के तो बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक के उपयोग को लेकर सरकार की गाइड लाइन है, जिसका पालन सरकारी अस्तपातों में बराबर होता है। निजी क्लीनिकों व अस्पताओं में एंटीबायोटिक की हाई डोज दी जाती है, जिससे मरीज पर गलत प्रभाव पड़ता है, जिससे जान को खतरा भी है। कई बार निजी अस्पताओं से उपचार लेकर मरीज जिला अस्पताल आते हैं, तो उनको यहां दी गई एंटीबायोटिक का असर ही नहीं होता है।
इसका कारण पहले से अधिक डोज डाक्टर शुरू से हाई डोज देते है और जब मरीज की हालत बिगड़ जाती है, तो सरकारी अस्पताल भेज देते है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में दी जाने वाली निर्धारित डोज का असर नहीं होता और मरीज को नुकसान होता है। स्टोर संचालक भी अधिक कमाई की डा. श्रीवास्वत ने बताया कि मेडिकल लालच में अपने मनमुताबिक एंटीबायोटिक्स दे देते है, जबकि उन्हें इस तहर दवा विक्रय करने का अधिकार नहीं हैं। एंटीबायोटिक के उपयोग निर्धारित मात्रा में लेने से लाभ भी होता चाहिए। एंटीबायोटिक का प्रयोग डाक्टर है, लेकिन हर बीमारी में नहीं लेना से सलाह लेने के बाद निर्धारित मात्रा ही करना चाहिए, नहीं तो इसके बहुत नुकसान है। उन्होंने ने कहा कि सभी लोग संकल्प ले कि एंटीबायोटिक का पर ही लेगें। साथ लोगों को जागरूक उपयोग निर्धारित और डाक्टर की सलाह करेंगे। आइजीएम इंस्टीट्यूट आफ
आइटी मैनेजमेंट कालेज शैली रजक ने कहा कि हम एंटीबायोटिक्स के उपयोग के बारे में जाने और लोगों की बताएं। एंटीबायोटिक्स का उपयोग ऐसा हो कि नुकसान न पहुंचे। यदि कोई डाक्टर व दवा विक्रेता मनमानी एंटीबायोटिक्स उपयोग करने के लिए दे रहे हैं, तो इसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग में करें। कार्रवाई का प्राविधान भी है। हालांकि अभी तक कार्रवाई के अभाव में रहा है। इसके सवास्थ्य विभाग को कड़े एंटीबायोटिक्स का मनमानी उपयोग हो कदम उठाने की जरुरत है। इनके साथ स्नेहा गौतम, अंकिता राय ने भी विचार रखे और सभी विद्यार्थियों व स्टाफ को एंटीबायोटिक्स के प्रति जागरूक करते सलाह के एंटीबायोटिक उपयोग नहीं हुए शपथ दिलाया कि बिना डाक्टर की करेंगे और लोगों भी जागरूक करेंगे।







