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नेपाल के विरोध-प्रदर्शन में 19 की मौत, गृहमंत्री का इस्तीफा:काठमांडू में प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मारने का आदेश; सोशल मीडिया बैन से नाराज युवा

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  श्रेया न्यूज़ सीमा सिंह शहडोल -:     नेपाल में फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाए जाने के विरोध में Gen-Z यानी 18 से 28 साल के युवा प्रदर्शन कर रहे हैं।

राजधानी काठमांडू समेत देश के कई शहरों में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी हुई है। विरोध प्रदर्शन नेपाल के 7 बड़े शहरों तक पहुंच गया है। यहां कर्फ्यू लगा दिया गया है।

सेना की तैनाती की गई है। हिंसक विरोध में अब तक 19 लोग मारे जा चुके हैं। 400 से ज्यादा घायल हैं। युवाओं की मांग है कि सरकार बैन हटाए और पारदर्शिता लाए।

काठमांडू प्रशासन ने तोड़फोड़ करने वालों को देखते ही गोली मारने के आदेश भी जारी किए। नेपाल के गृह मंत्री रमेश लेखक ने देश में जारी हिंसक प्रदर्शन के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

संसद के अंदर घुसने की कोशिश करते प्रदर्शनकारी।
संसद के अंदर घुसने की कोशिश करते प्रदर्शनकारी।
सोमवार को नेपाल के संसद भवन के बाहर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।
सोमवार को नेपाल के संसद भवन के बाहर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।
प्रदर्शनकारी युवा गेट फांदकर संसद भवन परिसर में घुस गए।
प्रदर्शनकारी युवा गेट फांदकर संसद भवन परिसर में घुस गए।
एक प्रदर्शनकारी युवक संसद के गेट से कूद गया।
एक प्रदर्शनकारी युवक संसद के गेट से कूद गया।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस के खदेड़े जाने पर एक प्रदर्शनकारी भागता हुआ।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस के खदेड़े जाने पर एक प्रदर्शनकारी भागता हुआ।

12 हजार प्रदर्शनकारी संसद तक पहुंचे

सोमवार सुबह 12 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी संसद परिसर तक पहुंच गए। इसके बाद सुरक्षा बलों ने कई राउंड फायरिंग की। आंसू गैस के गोले छोड़े, वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।

प्रदर्शनकारी इसके बाद भी नहीं माने। कई युवा बैरिकेड्स, दीवार-गेट फांदकर अंदर घुस गए। परिसर में आगजनी की। संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, उपराष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री आवास के आसपास कर्फ्यू लागू कर दिया गया है।

दूसरी तरफ, केपी ओली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगी रोक हटाने से साफ इनकार कर दिया। इससे पहले कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स से बैन हटा लिया है।

सरकार ने 3 सितंबर को सोशल मीडिया बैन किया था

नेपाल सरकार ने 3 सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया साइट्स पर बैन लगाने का फैसला किया था।

इन प्लेटफॉर्म ने नेपाल के संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। इसके लिए मंत्रालय ने 28 अगस्त को आदेश जारी कर 7 दिन का समय दिया था, यह समय सीमा 2 सितंबर को खत्म हो गई।

प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें…

सोशल मीडिया बैन के खिलाफ हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं।
सोशल मीडिया बैन के खिलाफ हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं।
युवाओं ने अन्य लोगों से भी आंदोलन में जुड़ने की अपील की है। इसके लिए क्यू आर कोड वाले बैनर भी बनाए गए हैं।
युवाओं ने अन्य लोगों से भी आंदोलन में जुड़ने की अपील की है। इसके लिए क्यू आर कोड वाले बैनर भी बनाए गए हैं।
आंदोलन में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं भी शामिल हुए हैं।
आंदोलन में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं भी शामिल हुए हैं।
युवाओं का कहना है कि उनका बोलना भी सरकार के लिए अपराध है।
युवाओं का कहना है कि उनका बोलना भी सरकार के लिए अपराध है।
एक प्रदर्शनकारी युवक ने आंसू गैस के कैन को वापस पुलिस की तरफ फेंका।
एक प्रदर्शनकारी युवक ने आंसू गैस के कैन को वापस पुलिस की तरफ फेंका।

नेपाल में सोशल मीडिया बंद क्यों हुआ?

नेपाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 7 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कराने का आदेश दिया था। सरकार का तर्क था कि रजिस्ट्रेशन के बिना ये प्लेटफॉर्म्स देश में फेक ID, हेट स्पीच, साइबर क्राइम और गलत सूचनाएं फैलाने के लिए इस्तेमाल हो रहे थे।

तय समय सीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर सरकार ने 4 सितंबर को 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगा दिया था। इसमें व्हाट्सअप, फेसबुक, यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म थे। टिकटॉक, वाइबर जैसे प्लेटफॉर्म पर बैन नहीं लगा, क्योंकि उन्होंने समय पर रजिस्ट्रेशन करा लिया था।

यूट्यूब जैसी 26 कंपनियां रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं करा सकीं

नियमों के मुताबिक हर कंपनी को नेपाल में लोकल ऑफिस रखना, गलत कंटेंट हटाने के लिए लोकल अधिकारी नियुक्त करना और कानूनी नोटिसों का जवाब देना जरूरी कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकार के साथ यूजर डेटा शेयर करने के नियम भी मानना जरुरी कर दिया गया।

कंपनियों को डेटा-प्राइवेसी और अभिव्यक्ति की आजादी के मामले में ये शर्तें बहुत सख्त लग रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत या यूरोप जैसे बड़े देशों में कंपनियां लोकल प्रतिनिधि रख लेती हैं, क्योंकि वहां यूजर बहुत ज्यादा हैं। लेकिन नेपाल का यूजर बेस छोटा है, इसलिए कंपनियों को यह बेहद खर्चीला लगा।

अगर कंपनियां नेपाली सरकार की यह शर्त मान लेती हैं, तो उन पर अन्य छोटे देशों में भी इन नियमों को पालन करने का दबाव पड़ता, जो काफी खर्चीला है। यही वजह रही कि पश्चिमी कंपनियों ने नेपाल सरकार की शर्त नहीं मानी और तय समय पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया।नेपाली PM का ऐलान- सोशल मीडिया पर बैन जारी रहेगा

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगी रोक हटाने से साफ इनकार कर दिया। कैबिनेट बैठक में सोमवार को उन्होंने कहा कि सरकार का फैसला सही है और सभी मंत्रियों को इसे सार्वजनिक रूप से समर्थन देना चाहिए। इससे कैबिनेट में तनाव बढ़ गया।

सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल नेपाली कांग्रेस के मंत्रियों ने बैन हटाने की मांग की। जवाब में ओली ने कहा कि सरकार ‘जेन जी के उपद्रवियों’ के आगे नहीं झुकेगी।

ओली के बयान के बाद कांग्रेस के मंत्रियों ने विरोध में बैठक से वॉकआउट कर दिया। आंतरिक मतभेद को देखते हुए प्रधानमंत्री ने सत्तारूढ़ गठबंधन की इमरजेंसी बैठक बुलाई है, ताकि बढ़ते राजनीतिक झगड़े को सुलझाया जा सके।

Shreya News
Author: Shreya News

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