सीमा सिंह शहडोल -: Heat Stroke: ग्वालियर में तापमान बढ़ने के साथ हीट स्ट्रोक के मामले भी बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल में हर रोज 15 से 20 मरीज हीट स्ट्रोक के लक्षण लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें से 2-3 मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ रहा है। अस्पतालों में लू और उल्टी-दस्त के मरीजों के लिए विशेष वार्ड बनाए गए हैं।
ग्वालियर (Gwalior Weather)। तापमान बढ़ने के साथ अर्ध बेहोशी, लो ब्लड प्रेशर, उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। हीट स्ट्रोक का शिकार होकर ग्वालियर जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग की ओपीडी में हर रोज 15 से 20 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें से दो से तीन मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ रहा है।
हजार बिस्तर अस्पताल में मेडिसिन विभाग के आउटडोर पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) में भी उल्टी-दस्त के साथ लू के शिकार 25 से 25 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। यहां ऐसे मरीजों के लिए छह पलंग रिजर्व किए गए हैं। अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को चिकित्सक खानपान में परहेज करने की सलाह दे रहे हैं।
धूप में शरीर ढंककर ही निकलें

जिला अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. नितेश मुदगल का कहना है कि 44 से 45 डिग्री तापमान होने और गर्म हवाएं चलने से हीट स्ट्रोक की शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। ऐसे में लोगों को चाहिए कि धूप में शरीर ढंककर ही निकलें। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में लू, उल्टी-दस्त, बुखार के शिकार मरीज ज्यादा पहुंच रहे हैं।
उल्टी-दस्त और बुखार से पीड़ित बढ़े
अस्पताल में लू तापघात वार्ड बनाया गया है, जिसमें दो से तीन मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों में 20 प्रतिशत लू, उल्टी-दस्त और बुखार से पीड़ित हैं। कुछ मरीजों को दो से तीन घंटे ग्लूकोज देकर डिस्चार्ज किया जा रहा है।
हीट स्ट्रोक के लक्षण
- मानसिक असंतुलन और दौरा पड़ने की स्थिति।
- शरीर का तापमान 104 डिग्री या उससे अधिक होना।
- तेज सिर दर्द, बातचीत में उलझन और अस्पष्टता।
- चक्कर या बेहोशी का अहसास, त्वचा पर चकत्ते।
- धड़कन का बढ़ना व डायरिया की दिक्कत।
यह रखें सावधानी
- कुपोषित बच्चे, वृद्ध, गर्भवती महिलाएं, श्रमिक धूप में आवागमन से बचें।
- धूप में निकलने से पूर्व पर्याप्त पानी पीकर, नाश्ता या भोजन करके निकलें।
- बार-बार पानी पीएं, छाछ, ताजा फलों के रस का उपयोग करें।
- तेज धूप में छाते का उपयोग अथवा कपड़े से सिर, बदन को ढंककर निकलें।
- लू-तापघात से प्रभावित रोगी को तुरंत छायादार ठंडे स्थान पर लिटाया जाए एवं त्वचा पर गीला कपड़ा फेरें और कपड़ों को ढीला कर दें।
- रोगी को ठंडे पेय पदार्थ दें एवं तत्काल नजदीक के चिकित्सा संस्था में उपचार के लिए लेकर जाएं।








