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कर्रेगुट्टा मुठभेड़ में 22 माओवादी ढेर, निर्णायक लड़ाई में 17 दिन में मारे गए 26 माओवादी

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    शैली पांडेय शहडोल इस अभियान के दौरान माओवादियों के लगाए हुए आइईडी की चपेट में आने से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कोबरा, छत्तीसगढ़ पुलिस की डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) जैसी इकाइयों के आधा दर्जन से अधिक जवान घायल हो चुके हैं।

, जगदलपुर। छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर बीजापुर जिले के कर्रेगुट्टा पहाड़ियों पर सुरक्षा बलों की ओर से पिछले 17 दिन से जारी अभियान में बुधवार को हुए मुठभेड़ में 22 माओवादियों को ढेर कर दिया गया है। माओवाद के खात्मे के लिए जारी इस निर्णायक लड़ाई में 24 अप्रैल व पांच मई को हुए मुठभेड़ में मारे गए चार माओवादी सहित अब तक 26 माओवादियों को सुरक्षा बल ने ढेर कर दिया है। मुठभेड़ स्थल से भारी संख्या में हथियार व विस्फोटक भी जवानों ने बरामद किए हैं।

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  • सुरक्षा बल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बस्तर में पिछले 15 माह में माओवादियों के प्रभाव क्षेत्र में खोले गए 42 से अधिक अग्रिम सुरक्षा शिविर (एफओबी) और वहां से नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत विकास कार्य से माओवादियों का आधार क्षेत्र सिमटता जा रहा था।
  • इसके बाद माओवादियों ने कर्रेगुट्टा की पहाड़ी को नया ठिकाना बनाया हुआ था और वहीं से माओवादी गतिविधियों को जारी रखे हुए थे।
  • कर्रेगुट्टा में शीर्ष माओवादी बसव राजू, दामोदर, हिड़मा, चंद्रन्ना समेत बटालियन नंबर-एक के 350 माओवादियों की उपस्थिति की पक्की सूचना के बाद बीते 21 अप्रैल को दस हजार से अधिक जवानों को एक निर्णायक अभियान पर भेजा गया था।
  • पिछले 17 दिन से 40 से 45 डिसे तापमान के बावजूद कर्रेगुट्टा पहाड़ी को छावनी बनाकर जवान वहां सर्चिंग अभियान चला रहे हैं। अब तक वहां से 200 से अधिक इंप्राेवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आइईडी), हथियार बनाने की फैक्ट्रियां, माओवादियों के रसद व अन्य सामान जब्त किए गए हैं।
  • इसमें कोबरा अधिकारी सहायक कमांडेंट सागर बोराडे भी शामिल हैं, जिन्होंने दो दिन पहले एक आइईडी विस्फोट में अपना एक पैर खो दिया था।

फोर्स ने बनाया अस्थायी डेरा

  • तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर कर्रेगुट्टा पर्वत श्रृंखला में इससे पहले कभी भी फोर्स नहीं पहुंची थी। माओवादी इस क्षेत्र को कारीडोर की तरह इस्तेमाल करते थे।
  • यह कारीडोर उनके लिए छत्तीसगढ़ में वारदातों को अंजाम देने और फिर तेलंगाना में शरण लेने का सुरक्षित मार्ग था। क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी के बावजूद फोर्स इस पहाड़ी पर पहुंचने में कामयाब रही और अब वहां अस्थायी डेरा डाल कर वहां से माओवादी विरोधी अभियान को गति दे रहे हैं।
  • इस दौरान 40 से अधिक जवान हिट-स्ट्रोक के शिकार हो गए बीमार पड़ गए थे। इसके बाद फोर्स ने रणनीति बदली और अब बारी-बारी से जवानों की तैनाती की जा रही है।
  • इसी सप्ताह सीआरपीएफ, डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा सहित पांच हजार जवानों की अदला-बदली की गई है। जवानों के लिए हेलीकाप्टर से लगातार रसद की आपूर्ति भी की जा रही है।

सेटेलाइट-ड्रोन से रख रहे नजर

  • सुरक्षा बल के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि इस पहाड़ी पर अब भी शीर्ष माओवादियों के छिपे होने की जानकारी है। फोर्स के आक्रामक अभियान के बाद वे कई टुकड़ों में बंटकर छिपे हुए हैं।
  • माओवादियों पर एनटीआरओ (राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन) के उपग्रहों से लाइव नजर रखने के साथ ही वायुसेना के हेलीकाप्टर, 20 बड़े और छोटे मानव रहित ड्रोन से नजर रखे हुए हैं।
  • बताया जा रहा है कि हिड़मा को पहाड़ी पर बने बंकर के पास अन्य माओवादियों के साथ देखा गया था, जिसके बाद यह अभियान छेड़ा गया है।
Shreya News
Author: Shreya News

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