सीमा सिंह शहडोल -: उज्जैन में वैशाख मास की दशमी से अमावस्या तक चलने वाली पंचक्रोशी यात्रा आज से शुरू हो गई है। यह यात्रा 27 अप्रैल तक चलेगी। इस बार की पंचक्रोशी यात्रा के लिए जिला प्रशासन ने सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए प्लानिंग की है। क्राउड मैनेजमेंट के लिए पहली बार यात्रा रूट पर पांच जगह हेड काउंटिंग कैमरे लगाए गए हैं।
पहली बार यात्रा में ऑटोमैटिक मैसेजिंग सिस्टम लगाया गया है। इसके जरिए एक ही जगह से सभी पड़ावों पर एक साथ मैसेज भेजे जा सकेंगे। कंट्रोल रूम से भी मैसेज का आदान-प्रदान किया जा सकेगा।
एक दिन पहले शुरू की 118 किमी की यात्रा उज्जैन में श्रद्धालुओं ने परंपरागत रूप से एक दिन पहले 22 अप्रैल से ही यात्रा शुरू कर दी।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन करने के बाद यात्रा के पहले पड़ाव पिंगलेश्वर महादेव के लिए निकल पड़े। पांच दिन तक चलने वाली यात्रा की शुरुआत 23 अप्रैल से होनी थी लेकिन एक दिन पहले 22 अप्रैल को ही पटनी बाजार स्थित श्री नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर पर भारी भीड़ पहुंच गई।
यहां श्रद्धालु भगवान को नारियल अर्पित कर 118 किमी की यात्रा के लिए निकले।
नागचंद्रेश्वर से शुरू, शिप्रा स्नान के साथ समापन पांच दिवसीय यह यात्रा उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर से शुरू होकर पिंगलेश्वर, करोहन, अंबोदिया, जैथल और उंडासा से होते हुए लौटेगी। यात्री इस दौरान शहर के चारों कोनों में बने मंदिर पिंगलेश्वर, कायावर्णेश्वर, विल्वेश्वर, दुर्दरेश्वर, नीलकंठेश्वर का पूजन-अर्चन करेंगे।
शनि मंदिर त्रिवेणी, राघौपिपल्या, नलवा, सोडंग और केडी पैलेस जैसे उपपड़ाव भी इसमें शामिल रहेंगे। समापन नागचंद्रेश्वर मंदिर लौटने के बाद शिप्रा नदी में स्नान के साथ होगा।
पहली बार 6 स्थानों पर करेंगे हेड काउंटिंग क्राउड मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए इस बार पड़ाव स्थलों सहित यात्रा रूट पर 6 जगह हेड काउंटिंग मशीनें लगाई गई हैं। इन मशीनों के जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि प्रत्येक पड़ाव पर कितने श्रद्धालु पहुंचे? कहां सबसे अधिक भीड़ है और किस स्थान पर भीड़ को डायवर्ट करने की जरूरत है।
हेड काउंटिंग कैमरों की मदद से सिंहस्थ के लिए क्राउड मैनेजमेंट की प्रैक्टिकल रिहर्सल भी हो जाएगी।सीसीटीवी कैमरों के साथ ऑटोमैटिक मैसेजिंग सिस्टम भी
जिला पंचायत सीईओ जयति सिंह ने बताया-हेड काउंटिंग मशीन उन पड़ावों पर लगाई गई हैं, जहां लोग एक लाइन में निकल रहे हैं। ऐसी 6 जगह चिह्नित कर कैमरे लगाए हैं। इसका डेटा भी आना शुरू हो गया है। जिला पंचायत, जनपद पंचायत सहित पड़ावों पर भी कुल तीन जगह कंट्रोल रूम बनाकर मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
इस बार पंचक्रोशी मार्ग और पड़ाव सहित पूरे रूट को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है। इसके साथ ही सेमी ऑटोमैटिक मैसेजिंग सिस्टम लगाया गया है। जिसके माध्यम से एक ही जगह से सभी पड़ावों पर एक साथ मैसेज भेजे जा सकेंगे। हेड काउंटिंग कैमरों से सिंहस्थ की रिहर्सल की जा रही है। इन कैमरों की मदद से श्रद्धालुओं की गिनती हो सकेगी। भीड़ को डायवर्ट किया जा सकेगा।
क्राउड मैनेजमेंट के लिए भीड़ बढ़ने के साथ ही तत्काल एक्शन लिया जा सकेगा।
स्कंदपुराण में कहा गया है- ‘न माधवसमोमासोन कृतेनयुगंसम्। इसका मतलब है कि वैशाख के समान मास नहीं। सतयुग के समान युग नहीं। वेद के समान शास्त्र नहीं। गंगा के समान तीर्थ नहीं।
भगवान विष्णु को अत्यधिक प्रिय होने के कारण ही वैशाख उनके नाम माधव से जाना जाता है। जिस तरह सूर्य के उदित होने पर अंधकार नष्ट हो जाता है, उसी प्रकार वैशाख में श्रीहरि की उपासना से ज्ञानोदय होने पर अज्ञान का नाश होता है।
हिंदू धर्मशास्त्रों में पंचक्रोशी यात्रा और वैशाख मास का महत्व माघ और कार्तिक मास के समान है। इस महीने में दान-पुण्य, स्नान और धार्मिक कार्य किए जाते हैं। पौराणिक मान्यता है कि जो लोग इस महीने में दान-पुण्य या स्नान नहीं कर पाए, वे पंचक्रोशी यात्रा में शामिल होकर या अंतिम पांच दिन में स्नान कर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
यही कारण है कि कई लोग यात्रा के लिए महाकाल की नगरी उज्जैन पहुंचते हैं। हालांकि ये यात्रा कब से शुरू हुई, इसका कोई सटीक उल्लेख नहीं है। फिर भी पंडितों का मानना है कि ये यात्रा अनादिकाल से चली आ रही है।
उज्जैन में ही क्यों की जाती है पंचक्रोशी यात्रा उज्जैन चौकोर आकार में बसा है। भगवान श्री महाकालेश्वर का स्थान इसके बीचोंबीच हैं। यहां बराबर अंतर से शिव मंदिर हैं, जो द्वारपाल कहलाते हैं। पूर्व दिशा में पिंगलेश्वर, दक्षिण में कायावर्णेश्वर, पश्चिम में बिल्वकेश्वर, उत्तर दिशा में दुर्दरेश्वर और नीलकंठेश्वर महादेव हैं।
इन पांचों मंदिरों की दूरी करीब 118 किलोमीटर है। यात्रा के दौरान इन्हीं पांचों शिव मंदिरों की परिक्रमा कर क्षिप्रा नदी में स्नान करते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार यात्रा के दौरान 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है।
हिंदू पंचांग में 5 अंक का महत्व
हिंदू पंचांग में 5 अंकों का विशेष महत्व है। वार, तिथि, योग, नक्षत्र और करण ये 5 अंक कहलाते हैं। इनमें से दो विशिष्ट की उपस्थिति भी अनुकूल होने से यात्रा शुभ मानी जाती है। श्रवण नक्षत्र भगवान विष्णु के संरक्षण में है और साध्य योग अपने आप में विशिष्ट की श्रेणी में आता है। यह यात्रा को साधने का अनुक्रम बनाता है।
तपती धूप में जहां कुछ देर खड़े रहना भी मुश्किल है, ऐसे में पंचकोशी यात्रा में प्रदेश भर से आए हजारों यात्रियों में बच्चे, बुजुर्ग, महिला, पुरुष 118 किमी की पैदल यात्रा करेंगे। इस दौरान वे यात्रा के मुख्य पड़ावों पर विश्राम करेंगे। पंचक्रोशी यात्रा में पिंगलेश्वर, करोहन, नलवा, अंबोदिया, केडी पैलेस, जैथल और उंडासा पड़ाव होंगे। कुल पांच पड़ाव और दो उप पड़ाव पर श्रद्धालु आराम कर सकेंगे।
जानिए… पड़ाव उप-पड़ाव की दूरी
नागचंद्रेश्वर से पिंगलेश्वर पड़ाव – 12 किमी
पिंगलेश्वर से कायावर्णेश्वर पड़ाव- 23 किमी
कायावर्णेश्वर से नलवा उप पड़ाव- 21 किमी
नलवा उप-पड़ाव से बिलकेश्वर पड़ाव 6 किमी
अंबोदिया से कालियादेह उप-पड़ाव- 21 किमी
कालियादेह उप पड़ाव से दुर्दरेश्वर पड़ाव (जैथल) – 12 किमी
दुर्दरेश्वर पड़ाव (जैथल) से उंडासा उप-पड़ाव- 16 किमी
उंडासा उप-पड़ाव से शिप्रा घाट- 12 किमी
यात्रियों को मिलेगी यह सुविधाएं
प्रत्येक पड़ाव, उप पड़ाव स्थल पर मार्गदर्शन के लिए कार्यालय / कंट्रोल रूम एवं पुलिस कैंप ।
प्रत्येक पड़ाव, उप-पड़ाव स्थल, विश्रांति स्थल पर छाया के लिए टेंट, प्रकाश व्यवस्था, शौचालय, स्नानागार, पेयजल व्यवस्था।
उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से खाद्य सामग्री जैसे आटा, दाल, चावल, शक्कर, चाय पत्ती एवं दैनिक उपयोगी वस्तुओं की विक्रय व्यवस्था।
उज्जैन दुग्ध संघ द्वारा सांची पाइंट के माध्यम से दूध, घी एवं दूध से निर्मित अन्य सामग्रियों का उचित मूल्य पर विक्रय।
पड़ाव एवं उप-पड़ाव के विश्राम स्थल पर ठंडे पेयजल के लिए टैंकर की व्यवस्था।
प्रत्येक पड़ाव, उप-पड़ाव स्थल पर 20 बेड का अस्थाई चिकित्सालय, प्राथमिक उपकरण, दवाइयां, स्टाफ की उपलब्धता।
आपात स्थिति के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था। प्रत्येक विश्रांति स्थल पर प्राथमिक चिकित्सा एवं पेट्रोलियम जेली वितरण।
जन सुविधा केंद्र एवं सतत बिजली आपूर्ति व्यवस्था।







