सीमा सिंह शहडोल -: मध्य प्रदेश में नक्सल गतिविधियों (Naxal in Madhya Pradesh)को रोकने के लिए स्टेट इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एसआईए) का गठन किया गया है। यह एजेंसी केंद्र की नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) की तरह काम करेगी। एसआईए नक्सलियों के नेटवर्क का पता लगाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।
- नक्सल गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश में एसआईए का गठन हुआ।
- एसआईए नक्सलियों के नेटवर्क का पता लगाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।
- केंद्र सरकार के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में भी हुआ एजेंसियों का गठन।
नक्सली गतिविधियों को रोकने, जांच व उनके विरुद्ध ऑपरेशन के लिए प्रदेश में स्टेट इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एसआईए) का गठन किया गया है। पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा के आईजी स्तर के अधिकारी को इसका प्रमुख बनाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि नक्सल प्रभावित अन्य राज्यों में भी इसी तरह की जांच एजेंसी बनाई गई है। यह केंद्र की नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) की तरह काम करेगी। एनआईए का गठन देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों पर कार्रवाई के लिए किया गया है।
नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में आएगी तेजी
केंद्र सरकार के निर्देश पर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में इसका गठन किया जा चुका है। नक्सलियों ने इन तीनों राज्यों को मिलाकर एक जोन (एमएमसी) बनाया हुआ है। एसआईए से इसमें नक्सलियों के विरुद्ध कार्रवाई में तेजी आएगी।

बता दें, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च, 2026 तक देश से नक्सल समस्या पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। एसआईए का गठन इसी दिशा में एक प्रयास है। इसका मुख्य काम नक्सलियों के नेटवर्क का पता लगाना है।
साथ ही, एजेंसी के अन्य कार्य नक्सलियों को आर्थिक सहायता कहां से मिल रही है, नक्सलियों द्वारा उपयोग किए जा रहे हथियार उन तक कैसे पहुंच रहे हैं, नए नक्सलियों की भर्ती का तरीका, ग्रामीणों से संपर्क की रणनीति, बड़ी नक्सली घटनाओं की जांच से संबंधित रहेगा। मध्य प्रदेश एसआईए नक्सल गतिविधियों की रोकथाम में एनआईए का भी सहयोग लेगी। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि एसआईए ने काम प्रारंभ कर दिया है।

मध्य प्रदेश में सक्रिय हैं 65 से 70 नक्सली
बता दें, मध्य प्रदेश में नक्सल प्रभावित बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में 65 से 70 नक्सली सक्रिय हैं। इनमें लगभग आधी महिलाएं हैं। ये नक्सली मूल रूप से छत्तीसगढ़ या महाराष्ट्र के हैं। मध्य प्रदेश के मात्र तीन ही हैं। पुलिस का प्रयास है कि ये नक्सली या तो आत्मसमर्पण कर दें या उन्हें मार दिया जाए। नक्सली संगठन में नई भर्ती नहीं होने पाए, यह भी पुलिस की कोशिश है।







