सीमा सिंह शहडोल -: मामला मध्य प्रदेश के विदिशा नगर पालिका का है। श्रम विभाग के प्रमुख सचिव ने मानव अधिकार आयोग को लिखे पत्र में बताया कि एक साल के दौरान कम वेतन से प्रभावित सफाई कर्मियों की दावा राशि 92 लाख 57 हजार 878 रुपये होती है। इस पर दस गुना मुआवजा राशि 9 करोड़ 25 लाख 78 हजार 780 रुपये हो गई।
- 146 सफाई कर्मियों के वेतन का मामला
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा
- अब श्रम विभाग ने सुनाया बड़ा फैसला
स्थानीय नगर पालिका को श्रम कानूनों का उल्लंघन भारी पड़ गया। उसने अपने 146 सफाईकर्मियों को न्यूनतम वेतन से भी आधे रकम का भुगतान किया। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद श्रम विभाग ने इन कर्मचारियों को मुआवजा के रूप में 10 करोड़ 18 लाख 36 हजार 658 रुपये देने के आदेश दिए है।
सरकार ने ऐसे कर्मियों का न्यूनतम वेतन 10 हजार 500 रुपये प्रति माह निर्धारित किया है लेकिन विदिशा नपा में पिछले नौ साल से सफाई कर्मियों को केवल पांच हजार रुपये दिए जा रहे थे।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक ऐसा पहुंचा मामला
- दो माह पहले राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो विदिशा दौरे के दौरान वाल्मीकि बस्ती में गए थे। इसी दौरान सफाई कर्मियों ने उन्हें इसकी शिकायत की थी।
- इसके बाद कानूनगो में आयोग में मामला दर्ज कर राज्य सरकार और नपा के अधिकारियों को नोटिस जारी किए थे। दो बार नोटिस जारी करने के बाद भी संतोषजनक जवाब नहीं आने पर आयोग ने अधिकारियों के खिलाफ समन जारी कर दिए थे।
- इसी के बाद राज्य का श्रम विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग सक्रिय हुआ और नपा के सभी कर्मचारियों को मार्च माह से ही न्यूनतम वेतन के रूप में दस हजार 200 रुपये जारी करने का आश्वासन दिया।

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श्रम विभाग ने लगाया दस गुना जुर्माना
श्रम विभाग के प्रमुख सचिव ने मानव अधिकार आयोग को लिखे पत्र में बताया कि उन्होंने विदिशा के श्रम अधिकारी के माध्यम से सभी 146 सफाई कर्मियों के बयान लिए। पाया गया कि सभी कर्मचारियों को न्यूनतम से आधा वेतन मिल रहा है। गणना के बाद श्रम विभाग ने दस गुना जुर्माना लगाया, जिससे कुल राशि 10 करोड़ 78 लाख 36 हजार 658 रुपये होती है। इस राशि का दावा प्रकरण श्रम विभाग के विदिशा कार्यालय में दर्ज किया गया है।
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सीएमओ ने लिखा, इसी माह से देंगे पूर्ण वेतन
सीएमओ दुर्गेश सिंह ने आयोग को लिखे पत्र में आश्वस्त किया कि सभी कर्मचारियों को मार्च माह का वेतन न्यूनतम वेतन के अनुसार ही दिया जाएगा। जब तक यह प्रकरण आयोग के समक्ष चलेगा, तब तक किसी भी कर्मचारी को नहीं हटाया जाएगा।







