सीमा सिंह शहडोल -: कुल 19 याचिकाओं में लगभग आधा सैकड़ा ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों ने यूपीएससी परीक्षाओं में अन्य आरक्षित वर्ग की भांति आयुसीमा में छूट देने की मांग की गई थी। इस मामले में हाई कोर्ट ने 24 फरवरी को हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था, जो अब सुनाया गया।
- सतना निवासी आदित्य नारायण पांडे ने दायर की थी याचिका
- याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल ने दलील दी
- कोर्ट ने सभी ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों की याचिकाएं निरस्त की
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में ईडब्ल्यूएस को अन्य आरक्षित वर्ग के समान आयु सीमा और नंबर ऑफ अटेम्प्ट में छूट का लाभ देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों की याचिकाएं निरस्त कर दीं।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों द्वारा सामना की जाने वाली बाधाएं अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए ईडब्ल्यूएस श्रेणियों के उम्मीदवारों को आयु सीमा में अधिक छूट देने की कोई आवश्यकता अनुभव नहीं की गई।
भारतीय संविधान के 103वें संशोधन संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत नागरिकों का एक अलग वर्ग निर्धारित किया गया है। आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों अलग-अलग है। नागरिक अनुच्छेद 16 (4) में उल्लेखित ईडब्ल्यूएस और एसईबीसी (एससी, एसटी और ओबीसी) अलग-अलग वर्ग हैं और आपस में मिलते-जुलते नहीं दिखते है।
क्या था मामला… सतना निवासी आदित्य नारायण पांडे की याचिका
- याचिकाकर्ता सतना निवासी आदित्य नारायण पांडे सहित अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग और संघ लोक सेवा आयोग के उन आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिनके कारण ईडब्ल्यूएस वर्ग का होने के बाद भी उम्र के आधार पर प्रतियोगी परीक्षा से वंचित किया जा रहा था।
- दरअसल, केंद्र की प्रतियोगी परीक्षाओं में एससी, एसटी व ओबीसी वर्ग को पांच वर्ष की आयु सीमा और नंबर ऑफ अटेम्प्ट का लाभ दिया जाता है। याचिकाओं में दलील दी गई थी कि चूंकि ईडब्ल्यूएस को भी आरक्षण की श्रेणी में रखा गया है, तो उसे भी यह लाभ मिलना चाहिए।
- याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि संविधान के 103 वें संशोधन में ईडब्ल्यूएस को एक अलग वर्ग घोषित किया गया है तो उस वर्ग के उम्मीदवारों को भी वर्टिकल आरक्षित वर्ग की भांति छूट का लाभ मिलना चाहिए।
- वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने दलील दी थी कि यूपीएससी ने सिविल सर्विसेज परीक्षा 2024 में अन्य वर्गों की तरह ईडब्ल्यूएस को आयु सीमा में छूट का लाभ नहीं दिया गया है, इसलिए इसे चुनौती दी गई है।
हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश के जरिए दे दी थी राहत
हाई कोर्ट ने इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई में ईडब्ल्यूएस को आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट की अंतरिम राहत दे दी थी। यह अंतरिम राहत दूसरी सुनवाई में भी बरकरार रखने हुए मामले की अंतिम सुनवाई की व्यवस्था दे दी गई थी। कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में साफ कर दिया था कि पांच वर्ष की आयु सीमा की छूट का लाभ विचाराधीन याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होगा। बिना अनुमति परिणाम घोषित न किए जाएं।
केंद्र व यूपीएससी की ओर से छूट का किया गया था विरोध
केंद्र शासन की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल वरिष्ठ अधिवक्ता पुष्पेंद्र यादव और यूपीएससी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश कौशिक ने पक्ष रखा था। उन्होंने दलील दी थी कि एसी, एसटी व ओबीसी को सामाजिक आरक्षण दिया गया है, जबकि ईडब्ल्यूएस को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया गया है, जिसके कारण इन दोनों आरक्षणों में कोई समानता नहीं है।







