सीमा सिंह शहडोल -: चेहरे पर घूंघट…हाथ में लट्ठ। ये नजारा रहा…मथुरा के बरसाने में चल रही लट्ठमार होली का। यहां शनिवार को 2 घंटे तक राधा बनीं हुरियारिनों ने कृष्ण रूपी हुरियारों पर जमकर लट्ठ बरसाए। हुरियारों ने भी गीत गाते हुए ढाल से अपना बचाव किया।
होली खेलने के लिए ये हुरियारे भगवान कृष्ण के गांव नंदगांव से ढाल लेकर 50Km दूर बरसाना पहुंचे। लट्ठमार होली के दौरान हेलिकॉप्टर से रंगीली गली के ऊपर फूल बरसाए गए।
बरसाने की वर्ल्ड फेमस होली देखने के लिए देश-विदेश से करीब 10 लाख लोग मथुरा पहुंचे। बरसाने की गलियां एकदम फुल रहीं। हर तरफ अबीर-गुलाल उड़ता रहा।
रंगीली गली की सावित्री कहती हैं- जब हम लोग होली खेलते हैं, तो ऐसा लगता है कि किशोरीजी (राधा) हमारे साथ हैं और ठाकुरजी हमारे सामने बैठे हैं।
सावित्री बताती हैं कि श्रीजी की सखियां ही लट्ठमार होली खेलती हैं। यानी बहुएं ही खेल सकती हैं। यहां की कुंवारी लड़कियां लट्ठमार होली नहीं खेलतीं। रंगीली गली की बहुएं श्रीजी की तरह अपने ठाकुरजी के लिए सजती हैं। हमारा श्रृंगार ठाकुरजी के नाम का है।
बरसाने में भारी भीड़ को देखते हुए जगह-जगह पुलिस तैनात रही। भीड़ को बांटने के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई। पुलिस वालों ने मचान बनाकर ऊंचाई से निगरानी की।
बरसाने में लट्ठमार होली शुरू हो चुकी है। हुरियारिनें लट्ठ लेकर हुरियारों पर टूट पड़ी हैं। हुरियारे भी खुद को लाठी से बचाते नजर आ रहे हैं।
मथुरा सांसद हेमा मालिनी ने दी होली की शुभकामनाएं
आगरा के डीएम अरविंद मलप्पा भी लट्ठमार होली देखने पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी मेरी हॉबी है। आज लंबे समय बाद इस हॉबी को जीने का मौका मिला है। पहली बार यहां यूपी में बरसाने की होली देखने का मौका मिला है। बंगारी मेरठ में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी रह चुके हैं।
इसके बाद वह मुजफ्फरनगर डीएम थे।
मथुरा में लट्ठमार होली शुरू होने वाली है। उससे पहले रंगीली गली में फोर्स बढ़ा दी गई है। डीआईजी शैलेश पांडे खुद मौके पर हैं और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं।मथुरा की एक गली में हुरियारों के बीच एक सांड घुस गया। इससे हुरियारों के बीच अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, बाद में हालात सामान्य हो गए।
वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए होली पर उपहार भेजा है। यह उपहार बाबा विश्वनाथ को स्पर्श करने के बाद भेजा गया, जिसमें लड्डू गोपाल के लिए भेंट, भस्म, चंदन, गुलाल, कबीर, बेलपत्र और रुद्राक्ष की माला शामिल हैं। उपहार भेजने का कार्य मुख्य कार्यपालक अधिकारी विष्णु भूषण मिश्रा द्वारा किया गया।
लट्ठमार होली शुरू होने से पहले हुरियारों को नाश्ता दिया जा रहा है। इसके बाद हुरियारन हुरियारों पर जमकर लट्ठ बरसाएंगीं। परंपरागत रूप से लट्ठमार होली खेली जाएगी।
हुरियारन अब से कुछ देर में हुरियारों पर लट्ठ बरसाएंगी। इससे बचने के लिए हुरियारे परंपरागत पगड़ी पहन सिर पर ढाल रख कर निकले हैं।
हुरियारों के लिए 1500 किलो ठंडाई और 500 किलो पकौड़ा तैयार किया गया है। इसके अलावा बूंदी, पेठा, मीठी मठरी से नंदगांव के हुरियारों का स्वागत किया जाएगा। अलग से भांग की ठंडाई भी तैयार की गई है।
रंगीली गली में हुरियारे होली खेलने के लिए बैठ चुके हैं। गायन शुरू हो चुका है। होली के गीत होली के गीत- रंग बिन कैसे होली खेलूंगी आज सांवरिया के संग, राधा तेरी सुंदर रंग दई साड़ी, राधा तेरी होली खेलन मैं आया… जैसे गीत गाए जा रहे हैं।
बरसाने की ऐतिहासिक रंगीली गली में होली सज चुकी है। हुरियारे अपनी परंपरागत वेशभूषा में यहां बैठकी जोड़ चुके हैं। अभी गीत संगीत, पदों का दौर चल रहा है। शाम 4 बजे लट्ठमार होली होगी।
भारी संख्या में पुलिस बल, आरएएफ, सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात गए हैं। सीसीटीवी से पूरी गली, इलाके को कवर किया गया है ताकि कहीं कोई असुविधा न हो। गली में बने घरों की छत से होली देखने की सख्त पाबंदी है। गली में जमकर रंग-गुलाल उड़ाया जा रहा है।
विदेशी श्रद्धालु भी बोले- राधे राधे
लट्ठमार होली के मौके पर विदेशी श्रद्धालु भी आनंद लेते नजर आए। इस दौरान विदेशी हुरियारे ने विक्ट्री का साइन दिखाया। फिर राधे-राधे कहा।रंगीली गली में लोग अपनी पैतृक पिचकारियों के साथ होली खेलने पहुंच रहे हैं। संजय गोस्वामी पीतल की 11 किलो की पिचकारी लेकर पहुंचे हैं। उन्होंने बताया- पिचकारी में ढाई लीटर रंग एक बार में भर जाता है। होली पर हर साल इस पिचकारी से रंग खेलते हैं। रंगीली गली की सावित्री कहती हैं- जब हम लोग होली खेलते हैं, तो ऐसा लगता है कि किशोरीजी (राधा) हमारे साथ हैं और ठाकुरजी हमारे सामने बैठे हैं। घर जाने पर हम हैरान हो जाते हैं कि कैसे सब किया। झाडू, बेलन सब हाथ से छूट-छूटकर गिरते हैं। नंदगांव से जो हुरियारे आते हैं, वो श्रीजी के रूप में हमें देखते हैं। हम उन्हें श्रीकृष्ण के रूप में देखते हैं।
सावित्री ने कहा- श्रीजी की सखियां ही लट्ठमार होली खेलती हैं। सिर्फ बहुएं खेल सकती हैं, यहां की कुंवारी लड़कियां लट्ठमार होली नहीं खेलती। हमने पूछा- नई बहू को कैसे सिखाते हैं, क्योंकि रंगीली गली की जिम्मेदारी तो उन्हें ही निभानी है?
अनीता ने कहा- हम ठाकुरजी के लिए श्रृंगार करते हैं रंगीली गली की अनीता कहती हैं- हमने मेहंदी लगवाई है, चूड़ी पहनते हैं। रंगीली गली की बहुएं श्रीजी की तरह अपने ठाकुरजी के लिए सजती हैं। हमारा श्रृंगार ठाकुरजी के नाम का है। फिर ठाकुरजी के साथ होली खेलते हैं।
राधा रानी ने श्रीकृष्ण को लट्ठ मारे तब शुरू हुई लट्ठमार होली
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार कृष्णजी राधा रानी से मिलने बरसाना पहुंचे।
वहां पर राधा जी और सखियों को चिढ़ाने लगे। उनके इस व्यवहार को देखकर राधा जी और उनकी सखियां कृष्णजी और ग्वालों की लाठी से पीटते हुए दौड़ाने लगीं। इस तरह उन्होंने सभी को सबक सिखाया।
ऐसी मान्यता है कि तभी से बरसाना और नंदगांव में लघुमार होली की शुरुआत हुई।
नंदगांव से ग्वाल बरसाना आते हैं, यहां राधाजी की सखियां उन पर लाठियां बरसातीं हैं, ऐसी मान्यता है कि कभी किसी को चोट नहीं पहुंचती है।
नंदगांव से होली खेलने बरसाना आते हैं हुरियारे
नंदगांव से बरसाना 50 km दूर…
नंदगांव से श्रीकृष्ण के सखा वानी हुरियारे चलकर बरसाना पहुंचते हैं।
यहीं पर श्रृंगार करते हैं, फिर कुंज गलियों से होते हुए लाडलीजी के मंदिर पहुंचते हैं।
इसके बाद बरसाना की गलियों में लट्ठमार होली शुरू होती है।
नंदगांव
बरसाना
वृन्दावन
गोवर्धन
मथुरा
बांके बिहारी मंदिर की 5 बड़ी अपील
1.ठाकुर जी पर गुलाल-माला दूर से ही फेंके या गोस्वामी को दें।
2.भक्त मंदिर में कीमती वस्तु लेकर न आएं।
3.बीमार, बुजुर्ग और छोटे बच्चों को मंदिर न लाएं।
4.मंदिर में एंट्री और एग्जिट के अलग-अलग गेट का इस्तेमाल करे।
5.शहर में लागू रूट डायवर्जन के अनुसार ही चलें।
ग्वाल बनवाते हैं 3 तरह की ढाल
सादी डाल लेदर और फोम से तैयार होती है।
र 4000 रुपए
वजन 7 Kg
नयी ढाल को बनाने में 24 घंटे का समय लगता है। नंदगांव से ऑर्डर आते हैं।ज्यादातर ग्वाल पुरानी ढाल की मरम्मत करवाते हैं। इसमें ढाल पर लगा लेदर बदला जाता है। सादी ढाल हुरियारे ज्यादा पसंद करते हैं हवा वाली लेदर और ट्यूब से बनती है. इसमें ट्यूब में हवा भर देते हैं।
4200 रुपए
वजन 8 Kg
लाइट वाली
लेदर में जगह बनाकर LED लाइट लगाते हैं। बैटरी की मदद से जलती है।
एक 5000 रुपए
बाजाचा 7.58 Kg
लट्ठमार होली के लिए रंगीली गली सजकर तैयार, 10 लाख टूरिस्ट पहुंचे
लट्ठमार होली के लिए रंगीली गली सजा चुकी है। रंग-बिरंगे कपड़ों की लरी से सजावट दिख रही है। फूलों की सुगंध से सब महक रहा है। यहां गलियों की दीवार पर लट्ठमार होली की पेंटिंग बनाई गई है। टूरिस्ट रंगीली गली के आसपास, सुदामा चौक, राधा रानी चौक और बृज दूल्हा गली पर लट्ठमार होली देख सकते हैं।
पुलिस के मुताबिक, 10 लाख लोगों के होने का अनुमान है, ऐसे में गलियों में ज्यादा देर तक खड़े रहने की मनाही है। लोग चलते रहेंगे। साथ ही, इस बार लोगों को छतों पर भी बैठने से मना कर दिया गया है। ताकि हादसे से बचाया जा सके।







