सीमा सिंह शहडोल -: वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट पर शिवभक्त चिताओं की राख से भस्म की होली खेल रहे हैं। डीजे, ढोल और डमरू की ताल पर शिवभक्त थिरक रहे हैं। मां काली और शिव बने कालाकारों ने तांडव कर रहे हैं।

एक तरफ चिताओं से उठता धुआं है, दूसरी तरफ राख की होली। यानी खुशी और गम साथ-साथ। आम इंसान जो चिता की राख से दूर भागता है, वो भी एक चुटकी राख के लिए घंटों इंतजार कर रहा है।
भीड़ इतनी कि पैर रखने तक की भी जगह नहीं है। कीनाराम आश्रम से शिव बारात निकल गई है। शिवभक्त तांडव करते हुए 2 किमी दूर घाट हरिश्चंद्र घाट जा रहे हैं। जगह-जगह कलाकार मुंह से आग की लपटें उगलेंगे। श्मशान घाट पर जलती चिताओं के बीच करीब 2500 किलो चिता भस्म की होली खेलेंगे।
इस होली को देखने के लिए 20 देशों से करीब 5 लाख टूरिस्ट काशी पहुंचे हैं। इस बार कमेटी ने महिलाओं को चिता भस्म की होली में शामिल होने की इजाजत नहीं दी है।
मणिकर्णिका घाट पर महिलाएं नहीं आएंगी
मणिकर्णिका घाट पर कल चिता भस्म की होली खेली जाएगी। महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर बाबा मसान नाथ मंदिर कमेटी व्यवस्थाएं संभालती है। आयोजन समिति के प्रमुख गुलशन कपूर ने बताया- दोपहर 12 बजे मसान नाथ की दोपहर की आरती होगी। 5100 चिताओं की भस्म जमा की गई है। जब भस्म उड़ती है, तो वह नीचे जमीन पर नहीं आती, बल्कि उड़ती रहती है। इस बार महाकुंभ होने की वजह से बहुत से नागा संन्यासी भी शामिल होंगे। बाबा के घर को बहुत सुविधा नहीं चाहिए, बस उन्हें खाली स्थान चाहिए।
कमेटी ने महिलाओं के मसाने की होली में आने पर प्रतिबंध लगाया है। इस बार महिलाएं नाव से महाश्मशान की होली देख पाएंगी। बढ़ती भीड़ और हुड़दंग की वजह से महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समिति ने यह फैसला लिया है।
चिता भस्म की होली पर 5 अपील
1हरिश्चचंद्र घाट पर सिर्फ नागा सन्यासी और अघोरी ही होली खेलेंगे।
2कलाकार सिर्फ शोभायात्रा में शामिल होंगे, घाट पर न आए।
3महिलाएं और पुरुष दूर से ही देखें, चिता भस्म की होली न खलें।
4नशा करके उत्सव में कोई भी शामिल न हो।
5घाट पर लाउडस्पीकर का उपयोग न करें।
ज्योतिषाचार्य बोले- चिता भस्म का शास्त्र में उल्लेख नहीं
काशी हिंदू विश्वविद्यालय प्रोफेसर ज्योतिषाचार्य डॉ. विनय पांडेय ने शास्त्र प्रमाणों के उदाहरण देते हुए कहा- चिता भस्म होली का उल्लेख किसी भी शास्त्र में नहीं है। यह अब एक इवेंट बन चुका है, जो सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
मसाने की होली से जुड़ी दो मान्यताएं
काशी में मसाने की होली से जुड़ी दो मान्यताएं हैं। हालांकि इन कथाओं का शास्त्रों या पुराणों में प्रमाण नहीं मिलता है।
मान्यता-1पार्वती के गौना के बाद खेली थी शिव ने होली
रंगभरी एकादशी के दिन शिव माता पार्वती का गौना कराकर उन्हें काशी लेकर आए। तब उन्होंने अपने गणों के साथ रंग-गुलाल से होली खेली, लेकिन वह श्मशान में बसने वाले भूत, प्रेत, पिशाच, यक्ष, गन्धर्व, किन्नर के साथ होली नहीं खेल पाए। इसलिए रंगभरी एकादशी के एक दिन बाद महादेव ने श्मशान में बसने वाले भूत-पिशाचों के साथ होली खेली।
मान्यता-2यमराज को हराने के बाद भोलेनाथ ने राख से खेली होली
एक बार यमराज ने शिव के भक्त मार्कंडेय की जान लेने की कोशिश की। शिव ने अपने गण भैरव को भेजा, जिन्होंने यमदूतों पर हमला किया। बाद में कार्तिकय का भी यमराज से युद्ध हुआ। आखिरकार शिव ने यमराज को हरा दिया। फिर काशी में चिता की राख से होली खेली। तभी से राख से होली खेली जाने लगी। इस होली को मृत्यु पर विजय का प्रतीक भी माना जाता
मुंबई और साउथ इंडिया के कलाकार पहुंचे काशी
होली का आयोजन करने वाले पवन कुमार चौधरी नेबताया- पवन चौधरी ने बताया- हम 25 साल से घाटपर मसाने की होली की व्यवस्था देखते आ रहे हैं।तांडव करने वाले भूत-पिशाचों में मुंबई और साउथ इंडिया के कलाकार शामिल होंगे। इसमें सभी लोग बाबा के बाराती की तरह शामिल होते हैं।इस आयोजन की तैयारी 6 महीने पहले से होती है। चिताओं की राख इकट्ठा की जाती है। जिसे भस्म के साथ होली के दिन उड़ाया जाता है।
अघोरपीठ बाबा कीनाराम से बारात निकलेगी
हरिश्चंद्र घाट पर चिता भस्म के होली का आयोजन करने वाले पवन कुमार चौधरी ने बताया- सुबह 10 बजे अघोरपीठ बाबा कीनाराम आश्रम से बारात निकाली जाएगी। अघोरपीठ बाबा कीनाराम, कालूराम, बाबा मसान नाथ की तस्वीर बग्घी पर रहेगी। डमरू दल के साथ घोड़े पर भोलेनाथ के 5 स्वरूप रहेंगे। कई झांकियों के साथ ढोल-नगाड़ा, बैंड पार्टी शामिल होगी।
उन्होंने बताया- रास्ते भर भूत-पिशाच के रूप में सन्यासी और कलाकार तांडव करते हुए दोपहर करीब 12 बजे घाट पहुंचेंगे। बारात कीनाराम जन्मस्थल से शुरू होकर आईपी विजया, भेलूपुर थाना होते हुए सोनारपुर से हरिश्चंद्र घाट पहुंचेगी। यहां बाबा मसान नाथ का भव्य श्रृंगार और आरती की जाएगी। यहां नागा सन्यासी, अघोरी चिता भस्म की होली खेलेंगे।
हरिश्चचंद्र घाट पर खेली जाएगी चिता भस्म की होली
काशी के महाश्मशान हरिश्चचंद्र घाट पर आज चिता भस्म की होली खेली जाएगी। भूत-पिशाच, योगिनी, भैरव, रौद्र रूप में काली, नरमुंड की माला पहने अघोरी, गले में नाग लपेटे विशाल नंदी पर सवार महाकाल शोभायात्रा निकालेंगे।
शिव बारात के रूप में तांडव करते हुए 2 किमी दूर घाट पहुंचेंगे। रास्ते में कलाकार मुंह से आग की लपटें उगलेंगे। श्मशान घाट पर जलती चिताओं के बीच करीब 2500 किलो चिता भस्म की होली खेलेंगे। सुबह 10 बजे से शुरू होकर करीब 4 घंटे ये तांडव चलेगा।







