Madhya Pradesh . 26 Dec 2024 . Saniya Ansari
सौरभ शर्मा व उसकी मां ने नौकरी पाने के लिए झूठा शपथ पत्र दिया था, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। साथ ही आइए जानते हैं कि आखिर सौरभ सोना-चांदी क्यों इकट्ठा कर रहा था?

52 किलो सोना और 235 किलो चांदी जब्ती केस में अब मुख्य आरोपी सौरभ शर्मा पर एक नया खुलासा हुआ है। बताया जा रहा कि परिवहन विभाग के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा ने विभाग में नौकरी पाने के लिए एक झूठा शपथ पत्र लगाया था, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से सर्कुलेट हो रहा है। सौरभ आरटीओ की कमाई की नकदी से कैसे सोने-चांदी में आगे बढ़ता गया इसे लेकर भी खबर सामने आ रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा के झूठे शपथ पत्र में कहा गया कि मेरे पिता के आश्रित सदस्यों में से कोई भी शासकीय एवं अर्ध शासकीय सेवा में नहीं है, जोकि सच नहीं है।
नौकरी पाने के लिए बोला झूठ
पिता के मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए सौरभ शर्मा ने अपने एफिडेविड में लिखा है कि मेरे पिता के आश्रित सदस्यों में से कोई भी शासकीय एवं अर्ध शासकीय सेवा में नहीं है, जबकि सौरभ का बड़ा भाई सचिन शर्मा इस दौरान छत्तीसगढ़ में पीएससी से सेलेक्ट होकर नौकरी कर रहा था। वहीं, सौरभ की मां ने भी अपने एफिडेविट में लिखा है मेरा बड़ा पुत्र सचिन शर्मा अपने परिवार के साथ 5 वर्षों से रायपुर छत्तीसगढ़ में नौकरी कर रहा है जो सरकारी नहीं है और मेरे पति पर आश्रित परिवार का कोई भी सदस्य शासकीय अथवा निगम मंडल परिषद आयोग आदि में नियमित व नियोजित नहीं है।
अब मध्य प्रदेश की लोकायुक्त पुलिस इस वायरल हो रहे शपथ पत्र को विवेचना में शामिल होकर कार्रवाई करने की बात कर रही है। ऐसे में आइए समझते हैं कि सौरभ शर्मा का क्या था सोना चांदी कनेक्शन, कैसे वह आरटीओ की कमाई से मिले पैसे को नकदी की बजाए सोने-चांदी में आगे बढ़ाता था?
सोना चांदी ही क्यों करता था इकट्ठा?
लोकायुक्त सूत्रों के मुताबिक, सौरभ शर्मा के पास आधा क्विंटल सोना और 2 क्विंटल से अधिक चांदी होने का राज अब धीरे-धीरे सामने आने लगा है। माना जा रहा है कि सौरभ शर्मा जानता था हर महीने आरटीओ विभाग के चेक पोस्ट से आने वाली करोड़ों की रकम भविष्य में भी उतनी ही रहने वाली थी जबकि अगर इसी पैसे को वह सोने और चांदी में निवेश करता तो उसके बदले भविष्य में मिलने वाला रिटर्न भी हर रोज बढ़ता ही जाएगा। दूसरा सोने और चांदी को अगर ईंटों की शक्ल में रखा जाए तो जेवर बनाने में लगने वाला लेबर चार्ज नहीं लगता, वहीं रखे हुए करोड़ों रुपए भविष्य में सोने की ईटों के रूप में सवा करोड़ की ईंट भी बन सकती हैं।
दरअसल लोकायुक्त पुलिस के गिरफ्त में मौजूद चंदन सिंह गौर ने यह खुलासा किया है उसने हर महीने होने वाली अवैध कमाई को सोना और चांदी में ज्यादा इन्वेस्ट किया है। माना जा रहा है सौरभ शर्मा अवैध कमाई से मिले करोड़ों के नोटों को कीमत से बचने के लिए चांदी की और सोने की बिस्किट खरीदता था और फिर अपने अवैध कारोबार को बढ़ाने के लिए उसके पास जो पैसा आता था, उसे आगे नेताओं और अधिकारियों तक बढ़ाने के लिए वह दोनों मोड का इस्तेमाल करता था।
नेता, अधिकारी को दोनों तरीके से करता था पेमेंट
अगर नेता अधिकारी कमाई नगदी में चाहते तो नगदी में और सोने चांदी के रूप में चाहते तो सौरभ के पास उसका भी लंबा इंतजाम था। यही वजह है कि सौरभ शर्मा के साथी चंदन सिंह गौर जी घर में रह रहा था उसमें खुफिया जगह पर पुलिस को 234 किलो चांदी की ईंटे मिली। रखे हुए पैसे को सोने और चांदी की ईंट में तब्दील करने की एक बड़ी वजह यह भी सौरभ मानता था की नगदी को चूहे को कुतर सकते हैं लेकिन सोना चांदी हमेशा बचा रह सकता है।
वहीं सूत्रों की मानें तो यूपीएससी की तैयारी करने वाला सौरभ शर्मा पैसे को कैसे सहेज कर रखा जाए इसका भी जानकार था। यही वजह है उसके घर से और अलग-अलग जगह से मिले पैसों के ऊपर बोरिक पाउडर भी डाला हुआ है जिससे माना जाता है कि रखे हुए पैसों पर दीमक नहीं लगती।







