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सिर्फ ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन हीं नहीं 10वीं और 12वीं भी जेल से कर सकेंगे कैदी

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      श्रेया न्यूज़ सीमा सिंह शहडोल-:    मध्य प्रदेश के ग्वालियर सेंट्रल जेल में कैदियों के लिए नई पहल शुरू की गई है। अब कैदी जेल में ही 10वीं और 12वीं की पढ़ाई कर सकेंगे। इससे कैदियों को शिक्षा और आत्मनिर्भरता का अवसर मिलेगा। जेल प्रबंधन और ओपन बोर्ड के बीच इसको लेकर चर्चा चल रही है।

ग्वालियर। जेल की ऊंची दीवारों और सख्त पहरे के बीच अब बदलाव की नई इबारत लिखी जा रही है। ग्वालियर सेंट्रल जेल, जो कभी केवल सजा काटने का ठिकाना मानी जाती थी, अब कैदियों के लिए शिक्षा और आत्मनिर्भरता का केंद्र बन गई है। अब तक जेल में कैदियों को स्नातक-स्नातकोत्तर की डिग्री और डिप्लोमा करवाया जा रहा था लेकिन अब कैदी जेल से दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई भी कर सकेंगे।

दरअसल, हर कैदी स्नातक-स्नातकोत्तर की डिग्री डप्लोमा जेल में नहीं कर पा रहा है। इसके पीछे कारण है कि वह 12वीं उत्तीर्ण नहीं है। इस समस्या को ध्यान में रखकर जेल प्रबंधन अब जेल में दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं करवाने की तैयारी कर रहा है। इसको लेकर जेल प्रबंधन और ओपन बोर्ड के बीच संवाद और पत्राचार भी लगातार चल रहा है। शीघ्र की जेल में सजा काट रहे कैदी दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई भी जेल से कर सकेंगे।

277 कैदी कर रहे डिग्री और डिप्लोमा

जीवाजी विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षण संस्थान और भोज विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने इस योजना से जुड़कर कैदियों को शिक्षा और कौशल विकास का अवसर दिया है। यहां कुछ कैदी पत्रकारिता की बारीकियां सीख रहे हैं, तो कुछ फैशन डिजाइनिंग में हाथ आजमा रहे हैं।

वहीं कई कैदी औषधीय पौधों की खेती सहित अन्य कोर्स भी कर रहे हैं। वर्तमान में 277 कैदी ऐसे हैं जो यहां से अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर रहे हैं। यह कैदी बीए, बीकाम, एमकाम, एमए जैसे पाठ्यक्रमों के साथ-साथ पत्रकारिता, फैशन डिजाइनिंग, जीएसटी, औषधीय खेती, फलित ज्योतिष और वैदिक गणित जैसे विशेष कोर्स भी कर रहे हैं।

भोज और इग्नू के सेंटर भी पढ़ा रहे

सिर्फ जेयू ही नहीं, बल्कि भोज यूनिवर्सिटी और इग्नू भी कैदियों की पढ़ाई में सहायक बन रही हैं। भोज यूनिवर्सिटी से कई कैदी बीए, एमए और डीसीए जैसे कोर्स कर रहे हैं, वहीं इग्नू के केंद्र से भी कैदी पढ़ाई कर रहे हैं। इस पहल में लगभग 212 पुरुष और 65 महिला कैदी शामिल हैं।

परंपरा से आधुनिकता तक पहुंची पढ़ाई

पहले जेलों में कैदियों को बढ़ईगीरी, लोहारगिरी और मिस्त्री जैसे पारंपरिक कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाता था। पर अब वक्त बदल रहा है। कैदियों को केवल पुराने हुनर तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि आधुनिक कौशलों जैसे कंप्यूटर शिक्षा, पत्रकारिता, संगीत, फैशन डिजाइनिंग और हस्तशिल्प से भी जोड़ा जा रहा है।ग्वालियर सेंट्रल जेल का यह प्रयास इस बात का सबूत है कि कैदी सिर्फ अपनी सजा काटने के लिए नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करने के लिए भी जेल में हैं।

कैदियों का 10वीं-12वीं करना भी जरूरी

कैदियों के लिए उच्च शिक्षा की पढ़ाई काफी समय से हो रही है, लेकिन उसके लिए कैदियों का दसवीं और बारहवीं करना भी जरूरी है। यही प्रयास किया जा रहा है कि अधिकतर कैदी शिक्षित हो सकें। – विदित सरवईया, अधीक्षक, सेंट्रल जेल ग्वालियर

Shreya News
Author: Shreya News

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