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Anuppur: साइबर ठगों के शिकंजे से मुक्त हुआ व्यापारी, 8 साल तक किया था डिजिटल अरेस्ट; CBI अधिकारी व जज बनकर ठगी

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Anuppur: पीड़ित आशीष ताम्रकार की नगर में एक इलेक्ट्रॉनिक दुकान है और वह वायदा बाजार में भी निवेश करता था। वर्ष 2017 में उसके द्वारा निवेश की गई राशि में से 23 लाख रुपये मिलने वाले थे, जिसकी भनक आरोपियों को लग गई। इसी के बाद से खेल शुरू हुआ था।  

अनूपपुर के कोतमा पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले गिरोह के एक शातिर आरोपी सौरभ शर्मा (32) को विदिशा से गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह गिरोह बीते 8 वर्षों से भाजपा नेता अवधेश ताम्रकार के पुत्र एवं व्यवसायी आशीष ताम्रकार (53) को डिजिटल अरेस्ट कर 45 लाख रुपये की ठगी कर चुका था। आरोपी सौरभ शर्मा के खिलाफ धारा 419, 420, 34 IPC के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। उसे शुक्रवार को न्यायालय में पेश कर चार दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है।

सीबीआई अधिकारी और जज बनकर ठगी
थाना प्रभारी रत्नांबर शुक्ला ने बताया कि आरोपियों ने सीबीआई अधिकारी, हाईकोर्ट के वकील, पुलिस अफसर और जज बनकर व्यवसायी से बातचीत की। फर्जी पहचान और डराने-धमकाने की रणनीति के जरिए उसे डिजिटल अरेस्ट किया गया और अलग-अलग खातों में 45 लाख रुपये डलवाए गए। घटना की शिकायत कोतमा थाने और पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान के समक्ष की गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए दो विशेष टीमों का गठन किया गया, जिनकी मदद से आरोपी सौरभ शर्मा को विदिशा से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से लैपटॉप, मोबाइल और कई दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।

इस तरह शुरू हुई ठगी
पीड़ित आशीष ताम्रकार की नगर में एक इलेक्ट्रॉनिक दुकान है और वह वायदा बाजार में भी निवेश करता था। वर्ष 2017 में उसके द्वारा निवेश की गई राशि में से 23 लाख रुपये मिलने वाले थे, जिसकी भनक आरोपियों को लग गई। इसके बाद एक व्यक्ति गौरव राजपूत ने खुद को वायदा बाजार से जुड़ा बताकर संपर्क किया और धीरे-धीरे संबंध बनाते हुए आरोपियों ने आशीष ताम्रकार को नीमच थाने का अधिकारी बनकर संपर्क किया। उन्हें विश्वास दिलाया गया कि उसकी रकम हवाला की है और वह कानूनी पचड़े में फंस सकता है।इसके बाद लगातार अलग-अलग नंबरों से कॉल कर सीबीआई, हाईकोर्ट, पुलिस अफसर बनकर धमकियां दी गईं और उसे डिजिटल अरेस्ट कर डराते हुए 8 वर्षों तक ठगी की जाती रही। आरोपियों ने वीडियो कॉल्स के ज़रिए पुलिस सायरन, नकली वर्दी और पहचान पत्र दिखाकर डर का माहौल बनाया।

 

मुख्य सरगना की हो चुकी है हत्या
इस गिरोह का मुख्य सरगना महेंद्र शर्मा (26) था, जिसकी वर्ष 2022 में चाकू मारकर हत्या कर दी गई। वह विदिशा सहित कई जिलों में 30 से अधिक मामलों में आरोपी था। गिरोह का दूसरा सदस्य रवि डेहरिया की दो माह पूर्व सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है।

भोपाल से चलाते थे फर्जी कंपनियां
आरोपियों ने साइबर ठगी को अंजाम देने के लिए भोपाल में ‘आर.बी. ट्रेडर्स’, ‘तिरुपति फिनटेक’ जैसी फर्जी कंपनियां बनाई थीं, जिनके जरिए वे खुद को प्रतिष्ठित व्यवसायी और कानूनी संस्थाओं से जुड़ा हुआ दिखाते थे। जब भोपाल में फर्जीवाड़े की भनक लगी तो गिरोह ने विदिशा में नई कंपनी शुरू की। गिरफ्तार आरोपी सौरभ शर्मा न सिर्फ साइबर ठगी में सक्रिय था, बल्कि वह निजी ठेकेदारी और जमीन दलाली का काम भी करता था। पुलिस अन्य फरार आरोपियों जैसे लकी कुमावत (सतवास पुनासा, जिला खंडवा) और चित्रांश ठाकुर की तलाश कर रही है। उनके खिलाफ भी जांच तेज कर दी गई है।

इन अफसरों की रही प्रमुख भूमिका
पूरे मामले की निगरानी पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान ने स्वयं की। कार्रवाई में थाना प्रभारी रत्नांबर शुक्ला, विवेचक श्यामलाल मरावी, लालजी श्रीवास्तव, रामखेलावन यादव, मनोज उपाध्याय, राजेंद्र अहिरवार और पंकज मिश्रा की अहम भूमिका रही।

‘8 वर्षों से डिजिटल अरेस्ट में फंसे व्यापारी को मुक्त कराया गया है। गिरफ्तार आरोपी शातिर है और उससे पूछताछ जारी है।’

मतिउर रहमान, पुलिस अधीक्षक, अनूपपुर

Shreya News
Author: Shreya News

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