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दो साल पहले पीएम मोदी जिस गांव पहुंचे, उसके हाल:शहडोल के पकरिया में टंकियां बनीं, मगर पानी नहीं, बिजली के खंभों में करंट नहीं

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  सीमा सिंह शहडोल -:     ” मैं गांव की सरपंच हूं, मेरे ही घर में पानी नहीं आता है, इधर-उधर भटकना पड़ता है। गांव के ज्यादातर लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। बिजली भी नहीं आती, घर में अंधेरा रहता है।

ये कहना है शहडोल जिले के पकरिया गांव की गेंद बाई बैगा का, जो यहां से दूसरी बार की सरपंच हैं। ये गांव एमपी के वीआईपी गांवों में शामिल है। दरअसल, दो साल पहले 1 जुलाई 2023 को पीएम मोदी पकरिया गांव आए थे और दो घंटे से ज्यादा देर रुके थे। उन्होंने इसी गांव से सिकल सेल अभियान की शुरुआत की थी।
इस दौरान पीएम सरपंच गेंद बाई समेत स्व सहायता समूह की कई महिलाओं से मिले थे।उन्होंने गांव के लोगों के साथ न केवल बातचीत की थी बल्कि उनके साथ बैठकर खाना भी खाया था। गेंद बाई कहती है- तब तो गांव की तस्वीर ही बदल गई थी बिजली, पानी, राशन की सुविधाएं लोगों को मिल गई थी।

दो साल बाद भास्कर जब पकरिया गांव पहुंचा तो तस्वीर अलग नजर आई। यहां पानी की टंकियां बनी हैं, मगर पानी ही नहीं है। दूसरी तरफ बिजली के खंभे भी लगे हैं मगर उनमें करंट नहीं है। इन हालात को लेकर भास्कर ने गांव वालों से बात की तो वे प्रशासन से नाराज दिखे। वहीं अधिकारी इस लापरवाही के लिए ठेकेदार को जिम्मेदार बता रहे हैं। पढ़िए रिपोर्ट

जानिए पीएम के दौरे से पहले गांव में क्या बदला था

पीएम मोदी पहले 27 जून को पकरिया गांव आने वाले थे, मगर मौसम खराब होने की वजह से उनके दौरे की तारीख बदल गई। वे 1 जुलाई को पकरिया गांव पहुंचे थे। पीएम के दौरे से 10 दिन पहले ही अधिकारियों ने मोर्चा संभाल लिया था। व्यवस्थाओं का जायजा लेने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पकरिया गांव पहुंचे थे।

उन्होंने ग्रामीणों से कहा था- यहां और कोई काम बाकी हो तो बताइए, वो भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। गांव के मुकेश बरगाही बताते हैं कि दो साल पहले पीएम मोदी के आने से पहले गांव की सड़क बन गई थी। लाइट और पानी की व्यवस्था भी हो गई थी। गांव में नए ट्रांसफॉर्मर भी लगाए थे। गांव वाले बेहद खुश थे कि गांव की सबसे बड़ी पानी की समस्या दूर हो गई।
गांव में पानी की किल्लत

गांव की किरण केवट ने बताया कि उनके पूरे मोहल्ले में पानी की किल्लत है। दो से तीन किमी दूर से पानी लाना पड़ता है। उनसे पूछा कि बाकी सुविधाएं मिलती है तो बोली- मुझे तो राशन नहीं मिलता और न ही पीएम आवास योजना का लाभ मिला है। गांव की बाकी महिलाओं से बात की तो उन्होंने बताया कि राशन तो मिलता है, लेकिन पानी की समस्या है।

 टंकियां बनीं, मगर पानी नहीं

जब हम गांव की गलियों में घूमे तो देखा कि पानी की टंकियां बनी हैं कुछ घरों में नल भी लगे हैं।गांव की चौपाल पर कुछ लोग बैठे थे उनमें से एक सत्ता बैगा ने कहा- यहां देखने वाला कोई नहीं है। सब कहते हैं कि ये करेंगे वो करेंगे, मगर करता कोई नहीं है। सत्ता बैगा ने बताया कि गांव में पानी की सुविधा नहीं है, जो हैंडपंप हैं वो भी खराब पड़े हैं। सत्ता बैगा गांव के पूर्व सरपंच कल्लू बैगा के भाई है।

पीएम के दौरे के बाद किसी ने सुध नहीं ली

गांव के ही मुकेश से पूछा कि चारों टोले में तो पानी की टंकियां बनी हैं, तो बोले- पीएम मोदी का दौरा था तो आनन-फानन में पानी की टंकियां बना दी गईं। दो साल हो गए टंकियों में एक बूंद पानी नहीं भरा है। पानी की सप्लाई के लिए ज्यादातर घरों में पाइप लाइन बिछा दी गई थी। कई घरों में तो नल तक नहीं लगा है। कुछ जगह तो पाइप लाइन खुली पड़ी है।

दो कमरे में रह रहा महिला सरपंच का परिवार

पकरिया गांव की सरपंच गेंद बाई बैगा से मिलने हम उनके घर पहुंचे तो देखा कि उनके मकान के केवल दो कमरे पक्के हैं, बाकी मकान कच्चा है। इसी घर में गेंद बाई अपने दो बेटे और जुड़वां बेटियों के साथ रहती है। साथ में बुजुर्ग सास भी है। उन्हें गांव वालों की परेशानियों के बारे में बताया तो बोलीं- मेरे ही घर को देख लो, कौन कहेगा कि ये सरपंच का घर है।

दो कमरों में हम पांच लोग रह रहे हैं। खाना बनाने के लिए रसोईघर तक नहीं है। इतने पैसे भी नहीं है कि घर के बाकी हिस्से को पक्का करवा सकूं। पीएम आवास योजना का फायदा सास को मिला है उसी से ये दो कमरे बने हैं।

उनसे बेटों के बारे में पूछा तो बोली- एक रिलायंस ग्रुप में काम करता है और दूसरा गैराज में काम करता है। दो जुड़वां बेटियां कॉलेज जाती हैं।
खुद पानी के लिए भटक रहीं सरपंच सरपंच गेंद बाई ने बताया कि गांव में पानी की बड़ी समस्या है, दूसरों के घर से लाना पड़ता है। सरपंच होकर दूसरों के घर से पानी लाने में अच्छा नहीं लगता। लोग क्या कहेंगे, लेकिन क्या करें? कुछ व्यवस्था नहीं होती। टोले में ज्यादातर बैगा परिवार ही रहता है। घर तो पक्के बने हैं, लेकिन पानी के लिए सबको जूझना पड़ता है। पानी की टंकी है वो भी अधूरी ही बनी है।

वह कहती हैं कि पति के गुजर जाने के बाद ऐसा ही चल रहा है। अंगूठा, दस्तखत लगवाकर ले जाते हैं। महीने में कुछ रुपए दे जाते हैं। बाकी कोई कुछ पूछता ही नहीं। मैं कुछ बोल नहीं सकती, कुछ पढ़ी-लिखी होती तो बोलती भी।

 जिम्मेदार बोले- ठेकेदार की वजह से काम में देरी

गांव में कई जगह पानी की समस्या समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर भी लिखे गए हैं।हमने उनमें से एक नंबर पर कॉल कर पानी की समस्याओं को लेकर बात की। नल-जल योजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि गांव के नलकूप चल रहे हैं। नल जल योजना का काम लगभग हो चुका है। ठेकेदार के काम में देरी की वजह से हर घर में पानी की सप्लाई नहीं हो पाई है।

वहीं बुढ़ार जनपद पंचायत के सीईओ संजीव लघाटे ने कहा,
” गांव में नल योजना का काम चल रहा है। पानी की कमी होने पर टैंकर से भी पानी उपलब्ध कराया जाता है। लोगों को समस्या है तो इस बारे में जानकारी लेकर समाधान करेंगे। नल-जल योजना को जल्द पूरा करवाने की हमारी कोशिश है। हमें गांव के सरपंच की तरफ से पानी की किल्लत की कभी कोई शिकायत नहीं मिली है।

Shreya News
Author: Shreya News

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