सीमा सिंह,शहडोल- शहडोल जिले में बुढार थाना पुलिस ने एक युवक का शव पहचान कराए बिना दफना दिया। जबकि पास के धनपुरी थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज थी। 5 दिन बाद उसके परिजन थाने पहुंचे। पुलिस ने उन्हें मृतक के कपड़े और उसके पास मिली चाबी दिखाई तब परिजन ने उसकी शिनाख्त की।
इसके बाद परिजन की मौजूदगी में शव को कब्र से बाहर निकाला गया। एसपी रामजी श्रीवास्तव ने इस मामले में कहा कि अस्पताल का फ्रीजर खराब होने के कारण शव का दफनाना पड़ा। हमने उसे जलाया नहीं, ताकि उसकी पहचान होने पर कब्र से निकाला जा सके।
सड़क किनारे मिला था युवक का शव
दरअसल, 14 जनवरी को बुढ़ार थाना क्षेत्र के बिड़ला माइंस रोड किनारे एक युवक का शव मिला था। पुलिस ने बिना जांच किए यह अनुमान लगा लिया कि ठंड की वजह से उसकी मौत हुई होगी। पुलिस ने शव की शिनाख्त किए बिना उसे दफना दिया। यह शव धनपुरी निवासी ऋतिक उर्फ भोला बर्मन का था। 11 जनवरी को युवक की मां सुशीला ने धनपुरी थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी
धनपुरी और बुढ़ार थाने की दूरी 4 किमी
भोला का घर धनपुरी इलाके में है। मां ने धनपुरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। भोला का शव घर से लगभग 6 किमी दूर करकटी गांव के पास मिला। यह क्षेत्र बुढ़ार थाना अंतर्गत आता है। धनपुरी और बुढ़ार थाना क्षेत्र की दूरी लगभग 4 किमी है। इसके बाद भी पुलिस समन्वय नहीं बना सकी और शव को अज्ञात बताकर दफन कर दिया।
पड़ोसी ने मृतक की मां को दी सूचना
मां सुशीला ने बताया कि पुलिस कोई मदद नहीं कर रही थी। 19 जनवरी की शाम पड़ोसी सोनू बर्मन घर आया। उसने बताया कि बुढ़ार थाने के करकटी गांव के पास युवक का शव मिला है। वह भोला की तरह दिखता है। अगले दिन मां ने अपने रिश्तेदारों को घटना की सूचना दी और परिजन को लेकर बुढ़ार थाना पहुंची I
गले में लटकी चाबी देखकर पहचान
युवक की मां ने बताया कि बुढ़ार थाना प्रभारी संजय जायसवाल ने कपड़ा और एक चाबी मुझे दिखाई। यह हमारे घर की चाबी थी। जो हमेशा भोला के गले में लटकी रहती थी। मैं चाबी और कपड़ा देखकर तत्काल पहचान गई। इसके बाद पुलिस ने एसडीएम से अनुमति लेकर शव को कब्र से खोदकर हमें सौंपा।
हमने अपने हाथों से खुदवाया कब्र
मृतक भोला के बड़े पिता के बेटे ओमप्रकाश बर्मन ने बताया कि हमने पुलिस के साथ मिलकर अपने हाथों से कब्र खोदकर अपने भाई का शव निकलवाया है। पुलिस ने जेसीबी की व्यवस्था की थी, लेकिन उससे नहीं हो पा रहा था। इसके बाद हम लोगों ने मिलकर खुदाई की।
मां ने कहा-बुझ गया घर का चिराग
मां सुशीला धनपुरी नगर पालिका में दैनिक वेतन भोगी हैं। भोला बर्मन अपनी मां का इकलौता बेटा था। मां सुशीला 9 साल पहले अपनी शादीशुदा बेटी को खो चुकी हैं। सुशीला के जीवन का अंतिम सहारा भोला ही था। वह मिर्गी से ग्रसित था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह बेटे का इलाज नहीं करा पा रही थीं।
पुलिस ने कहा-सभी थानों पर भेजी थी फोटो बुढ़ार थाना प्रभारी संजय जायसवाल के मुताबिक, करकटी के पास लावारिस शव मिला था। हमने जिले के सभी थानों में फोटो के साथ जानकारी भेज दी थी। खबरें मीडिया में भी फोटो के साथ चलीं। बुढ़ार अस्पताल का फ्रीजर खराब था। इस कारण शव को ज्यादा समय तक नहीं रख सकते थे। बाद में जब अज्ञात शव के फोटो देखकर परिजनों ने पहचान की, तब एसडीएम से अनुमति लेकर तहसीलदार की मौजूदगी में शव को निकालकर परिजनों को सौंप दिया गया।
48 घंटे शव को सुरक्षित रखने का है नियम बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश सिंह बघेल के मुताबिक, किसी भी अज्ञात शव को कम से कम 2 दिन तक सुरक्षित रखने का नियम है। शव की मौजूदा स्थिति से भी तय होता है कि शव को किन हालात में और कैसे दफनाया जाएगा। यदि शव का चेहरा, कपड़ा या कोई अन्य निशान मौजूद हों तो पुलिस 2 दिन बाद इन वस्तुओं को सुरक्षित रखकर शव को दफना सकती है। चेहरा पहचान नहीं होने या कोई निशान वस्तु नहीं मिलने की स्थिति में डीएनए के लिए विसरा को सुरक्षित रखा जाता है।







