श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- उमरिया। पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में आलीशान रिसॉर्ट निर्माण में नियमों की अनदेखी तो की ही गई, शासन-प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास भी किया गया। गुरुग्राम में तैनात वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी.श्रीनिवास कुमार ने ग्राम पंचायत से होमस्टे बनाने की अनुमति की आड़ में जंगल के प्रतिबंधित क्षेत्र में रिसॉर्ट का निर्माण करा दिया। यह बात भी सामने आ चुकी है कि कोर क्षेत्र में राजगढ़ गांव स्थित जिस खसरा नंबर 1841 की भूमि पर निर्माण कराया गया है, उसका बड़ा हिस्सा वन भूमि है।
वन्यजीव गलियारे को खतरा और पंचायत की भूमिका पर उठे सवाल
निर्माण में भूमि के रिकॉर्ड की अनदेखी करने के साथ भूमि के वास्तविक उपयोग में भी हेरफेर की गई। इतना ही नहीं इस निर्माण के दौरान वन्यजीव गलियारे की अनदेखी कर वन्यजीवों का जीवन भी संकट में डाला गया। अभी तक जो जांच हुई है, उसमें सिर्फ जंगल की जमीन पर अतिक्रमण की ही बात हो रही है। हालांकि उस पर भी अब तक कोई कार्रवाई शासन ने नहीं की है। जबकि इस मामले का बड़ा पक्ष यह है कि वनभूमि पर निर्माण करके वन्यजीव गलियारे को भी प्रभावित किया गया है।
यह जांच का विषय होना चाहिए कि वनभूमि पर निर्माण से वन्यजीवों का मार्ग कितना प्रभावित हुआ। वन्यजीव विशेषज्ञ अब यही मांग कर रहे हैं। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे का कहना है कि पन्ना टाइगर रिजर्व की करीब पांच एकड़ भूमि पर बने विवादित रिसॉर्ट का मामला सिर्फ कोर जोन में रिसॉर्ट विवाद की बजाय, राजस्व रिकॉर्ड, निर्माण की वास्तविक प्रकृति और वन्यजीव गलियारे के बीच टकराव का भी है। इसकी जांच इसी रूप में की जानी चाहिए।
होमस्टे के नाम पर लिया गया परमिशन, नहीं ली गई वन विभाग से अनुमति
वनभूमि के विशाल भाग पर रिसॉर्ट का निर्माण करने के लिए पंचायत से होमस्टे के नाम पर अनुमति प्राप्त की गई। होमस्टे के लिए पंचायत से अनुमति लेकर एक विशाल रिसॉर्ट खड़ा करके भूमि के वास्तविक उपयोग पर पर्दा डालने का प्रयास किया गया, जो बड़ा अपराध है।
यहां यह भी खास है कि होमस्टे के लिए वन विभाग से भी अनुमति लेनी होती है, जबकि इस मामले में कोई अनुमति नहीं ली गई। इस मामले में पंचायत प्रतिनिधियों को भी संदेह के घेरे में लेना चाहिए, क्योंकि पंचायत ने होमस्टे के लिए अनुमति तो प्रदान कर दी, लेकिन यह नहीं देखा कि उसकी अनुमति का क्या उपयोग किया जा रहा है।









