श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- उमरिया जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार जिले में कुल 33 पैथोलाजी लैब संचालित हो रही हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 11 पैथोलाजी का ही वैध पंजीयन है। यानी करीब 22 पैथोलॉजी रजिस्ट्रेशन के संचालित होने का दावा किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है कि बिना पंजीयन किसी भी पैथोलाजी का संचालन न होने दिया जाए। इसके बावजूद जिले में बड़ी संख्या में लैब खुलकर काम कर रही हैं। सवाल यह है कि जब इन संस्थानों का पंजीयन ही नहीं है तो आखिर इनके संचालन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं है या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई
कारोबार का बड़ा नेटवर्कः जिले में कई पैथोलाजी जांच के नाम पर केवल कारोबार कर रही हैं। मरीजों को विभिन्न अस्पतालों और क्लीनिकों से जांच के लिए भेजा जाता है। इस पूरे नेटवर्क में कमीशन का खेल भी चल रहा है। जांच के लिए मरीज जितनें अधिक भेजे जाते हैं, उतना ही आर्थिक लाभ जुड़े लोगों को मिलता है। यही वजह है कि नियमों की अनदेखी कर कई अवैध पैथोलाजी भी बेखौफ तरीके से संचालित हो रही हैं।
यह जानकारी भी सामने आ रही है कि जिले के कुछ सरकारी अस्पतालों से पैथोलाजी लैब को कॉटन और सिरिंज जैसी आवश्यक सामग्री भी विभागीय कर्मचारियों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। पैथोलाजी रिपोर्ट के आधार पर ही डॉक्टर मरीज का इलाज तय करते हैं। यदि जांच किसी ऐसे संस्थान में हो रही है जो निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो गलत रिपोर्ट आने की संभावना बढ़ जाती है।
इसका सीधा असर मरीज के उपचार पर पड़ सकता है और कई बार गंभीर परिणाम भी सामने आ सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जिले की सभी पैथोलॉजी लैब का भौतिक सत्यापन कराया जाए, उनके पंजीयन, उपकरणों, योग्य तकनीशियनों और गुणवत्ता मानकों की जांच की जाए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. वीएस चंदेल से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। यदि जांच में कोई पैथोलॉजी बिना पंजीयन या नियमों के विरुद्ध संचालित पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।







