श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- उमरिया। खाद की कालाबाजारी देखते हुए सरकार ने खाद की कालाबाजारी की सूचना देने वाले को सूचना दाता प्रोत्साहन योजना के तहत एक हजार रुपये नकद इनाम देने की योजना लागू की है। यह योजना उमरिया में लागू की गई है।
प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खाते में दी जाएगी
योजना के तहत खाद की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, नकली या मिलावटी खाद की बिक्री और यूरिया के अवैध औद्योगिक उपयोग की सूचना देने पर एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खाते में दी जाएगी।
सरकारी हेल्पलाइन नंबर 155253 जारी
शिकायत के लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 155253 जारी किया है। सूचना देने वाले की पहचान भी गुप्त रखी जाएगी। यह योजना 30 सितंबर तक चलेगी।
डीजल के लिए कतार में किसान, बोले- खेती समय मांगती है, इंतजार नहीं
ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के सीजन के दौरान किसानों को डीजल की उपलब्धता को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि खेती का काम मौसम और समय के अनुसार चलता है, ऐसे में ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों के लिए समय पर डीजल नहीं मिलना उनकी पूरी कार्ययोजना को प्रभावित कर देता है।
खेत में ट्रैक्टर रुकने का मतलब सिर्फ मशीन का बंद होना नहीं
किसानों का कहना है कि खेत में ट्रैक्टर रुकने का मतलब सिर्फ मशीन का बंद होना नहीं है, बल्कि किसान की मेहनत, समय और उम्मीदों पर भी असर पड़ना है। वर्तमान में किसान पहले खाद के लिए कतार में लग रहा है, फिर उपज बेचने के लिए इंतजार कर रहा है और अब डीजल की उपलब्धता के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
समय पर काम नहीं तो नुकसान
किसानों के अनुसार खेती के महत्वपूर्ण समय में एक-एक घंटा काफी अहम होता है। जुताई, बोवनी और अन्य कृषि कार्य निर्धारित समय पर पूरे नहीं होने से फसल उत्पादन पर असर पड़ सकता है। कृषि कार्यों के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता जरूरी है, क्योंकि अधिकांश किसान ट्रैक्टर और डीजल आधारित मशीनों पर निर्भर हैं।
खेत की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर संचालित करें
किसानों ने सरकार से मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डीजल की उपलब्धता को लेकर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे किसानों को अनावश्यक इंतजार और परेशानी का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि कृषि व्यवस्था को किसानों की जरूरतों और खेत की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर संचालित किया जाना चाहिए।
संसाधन उपलब्ध होंगे तो वह बेहतर उत्पादन कर सकेगा
किसानों का कहना है कि देश की खाद्य सुरक्षा सीधे तौर पर किसान की मेहनत से जुड़ी है। यदि किसान को समय पर संसाधन उपलब्ध होंगे तो वह बेहतर उत्पादन कर सकेगा। इसलिए जरूरी है कि खेती से जुड़े संसाधनों की उपलब्धता आसान और व्यवस्थित बनाई जाए, ताकि अन्नदाता बिना बाधा अपने कृषि कार्य पूरे कर सके।









