श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- डिंडौरी। जिले के बजाग थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तांतर में धर्म परिवर्तन के लिए प्रलोभन और धमकी देने का मामला सामने आया है। पीड़ित किसान राकेश कुमार बोरकर की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी वाहमनसिंह माण्डले के खिलाफ बीएनएस और मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है।
क्या है यह मामला
प्राप्त एफआईआर के अनुसार, 22 मई 2026 को ग्राम तांतर निवासी 34 वर्षीय राकेश कुमार बोरकर पिता कंगलीसिंह ने थाना बजाग पहुंचकर टाइपशुदा आवेदन दिया। सरपंच गोविंद बोरकर, पत्नी संगीता बाई और भाई गृहदयाल के साथ आए राकेश ने बताया कि पड़ोसी वाहमनसिंह माण्डले ईसाई धर्म मानता है। वह घर में दुआ-प्रार्थना करता है और झाड़-फूंक से बीमारी ठीक करने का दावा करता है।
शिकायत में राकेश ने आरोप लगाया कि करीब 6 माह पहले उसकी पत्नी संगीता बाई की तबीयत खराब हुई थी। तब वाहमनसिंह ने कहा कि तुम्हारी पत्नी को ठीक कर दूंगा। राकेश के अनुसार वह वाहमन के घर गया जहां उसने दुआ-प्रार्थना की। इसके बाद वाहमनसिंह ने कहा कि “इस मसीह को नहीं अपनाओगे तो तुम्हारी पत्नी ठीक नहीं होगी, वह मर जाएगी।”
धमकी और पैसे का प्रलोभन
एफआईआर में दर्ज कथन के मुताबिक, जब राकेश ने धर्म परिवर्तन से मना किया तो आरोपी ने धमकाया। आरोप है कि वाहमनसिंह ने कहा कि “अगर तुम ईसू को मानोगे तो मैं तुम्हें बहुत सारा पैसा भी दूंगा।” मना करने पर धमकी दी कि “अगर ईसू को नहीं मानोगे तो तुम्हारी पत्नी को दुआ कराकर मार डालूंगा।”
राकेश का आरोप है कि आरोपी ने डरा-धमकाकर घर की रामायण जलाने और “हमारे धर्म की किताबें” घर में रखने को कहा। राकेश ने कहा कि इससे उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है और गांव का माहौल खराब हो रहा है। डर के कारण पहले रिपोर्ट नहीं की थी।
पुलिस ने दर्ज किया अपराध
थाना प्रभारी बजाग को दिए आवेदन पर पुलिस ने प्रथम दृष्टया धारा 196(1)(a) बीएनएस और धारा 3, 5 मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के तहत अपराध घटित होना पाया। मामले को विवेचना में लिया गया है।
मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के तहत गलत बयानी, प्रलोभन, बल, असम्यक असर, प्रपीड़न या विवाह द्वारा या किसी अन्य कपटपूर्ण साधन से धर्म परिवर्तन कराना अपराध है। दोषी पाए जाने पर 3 से 10 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
गौरतलब है कि आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में धर्मांतरण का यह कोई पहला मामला नहीं है। पहले भी इस तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं। प्रशासन का कहना है कि कानून के दायरे में निष्पक्ष जांच की जाएगी।







