श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- मंदसौर। श्वानों के हमले थम नहीं रहे हैं। जिला मुख्यालय से लेकर जिलेभर में श्वानाें के कारण खतरा बना हुआ हैं। लंबे समय से नगर पालिका श्वानों की नसबंदी की प्रक्रिया प्रारंभ करने की बाते कर रही हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कार्य प्रारंभ नहीं हैं। शहरभर के लगभग सभी क्षेत्रों में श्वानों के झुंड कभी बच्चों तो कभी बड़ों पर हमला कर रहे हैं। जिलेभर में हर माह औसतन 600 लाेगों को श्वान काट रहे हैं। जिले में श्वानों के हमले से दो मासूमों की मौत भी हो चुकी हैं।
जिले में 15 माह में श्वानों के हमले ने दो मासूमों की जान ली हैं। मंदसौर नगर में 3000 से अधिक श्वान सड़को पर घुम रहे हैं। जिलेभर में प्रतिमाह 600 से अधिक लोगाें को श्वान काट रहे हैं। इनमें बच्चे और बुजुर्गो की संख्या अधिक हैं। नगरपालिका जब-जब भी कार्रवाई करती हैं श्वान प्रेमी विरोध करते हैं। इसके कारण भी आवारा आतंक से परेशानी बढ़ रही हैं।
सुवासरा में चार जून 2025 को चार वर्षीय मासूम आयुष पुत्र दशरथदास बैरागी पर श्वानों के झुंड ने हमला कर दिया था। श्वानों ने मासूम को इस तरह काटा कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई। इससे पहले 12 मार्च 2024 को भानपुरा से लगभग ढाई किमी दूर गरोठ रोड पर श्वानों झुंड ने 11 साल की तनीषा पुत्री लोकेशनाथ बैरागी निवासी लोटखेड़ी पर हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया था। स्वजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
क्या परेशानी होती है
श्वान के काटने से चिकित्सकों के अनुसार श्वान की लार में रैबीज नामक वायरस होता हैं। श्वान के दांत लगने से यह वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता हैं। शरीर पर इससे होने वाले दुष्प्रभाव का असर तत्काल दिखाई देने लगे, यह जरूरी नहीं। इलाज नहीं कराने पर 20 साल में कभी भी वायरस सक्रिय हो सकता हैं। रैबीज वायरस के कारण मरीज हाइड्रोफोबिया हो जाता हैं। इसमें याददाश्त खोना, पानी से डरना, लोगों को काटना, इधर-उधर भागना जैसी हरकतें मरीज करते हैं। श्वान के काटने से मौत भी हो सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि श्वान के काटने के मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
श्वानों के हमले के बड़े मामले
- भानपुरा से लगभग ढाई किमी दूर गरोठ रोड पर 12 मार्च 2024 को श्वानों के झुंड ने बालिका पर हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया था। स्वजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। खेत पर 11 साल की तनीषा पुत्री लोकेशनाथ बैरागी निवासी लोटखेड़ी अकेली थी। तभी करीब सात श्वानो के झुंड ने मिलकर उस पर हमला कर दिया।
- 4 जून 2025 को सुवासरा में चार वर्षीय बालक आयुष पुत्र दशरथदास बैरागी घर के बाहर खेल रहा था। तभी श्वानों ने झुंड ने हमला कर दिया, जिससे बालक की मौत हो गई थी।
- 26 अप्रैल 2024 की रात में शहर के नृसिंहपुरा क्षेत्र में श्वानों के झुंड ने एक मजदूर युवक पर हमला किया, श्वानो से बचते हुए 28 वर्षीय युवक अमरसिंह पुत्र चतरसिंह चौहान निवासी सत्यनारायण कालोनी सड़क पर गिर गया था, बचाने के लिये शोर मचाया तब लोग पहुंचे और श्वानों को भगाकर युवक को बचाया। युवक के हाथ-पैर में श्वानों ने काटा था। उपचार के बाद युवक ठीक हुआ।
- 13 मई 2024- मदारपुरा, शनि विहार एवं खानपुरा क्षेत्र में 13 मई को श्वानों के हमले से छह लोग घायल हो गए थे। घायलों में एक महिला भी शामिल थी। घायलों में पुलिसकर्मी भी शामिल थे। श्वानों के हमले में घायल हुए बुजुर्ग बाबूसिंह ने कहा था की श्वान ने हमले से मैं जमीन पर गिर गया फिर होश ही नहीं रहा।







