SUBSCRIBE NOW

Home » जिला समाचार » शहडोल के सरसी आईलैंड में नाव डूबी तो बचाव के लिए रेस्क्यू टीम नहीं, भगवान भरोसे पर्यटकों की जान; पर्यटन विभाग की बड़ी लापरवाही

शहडोल के सरसी आईलैंड में नाव डूबी तो बचाव के लिए रेस्क्यू टीम नहीं, भगवान भरोसे पर्यटकों की जान; पर्यटन विभाग की बड़ी लापरवाही

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

  श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :-  शहडोल। जिले के ब्यौहारी विकासखंड के पपौंध थाना क्षेत्र स्थित सरसी गांव के पास बाणसागर बैक वाटर में बना सरसी आईलैंड सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। इसका संचालन मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से किया जा रहा है, लेकिन यहां पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है।

बरगी हादसे के बाद खुली व्यवस्थाओं की पोल

जबलपुर के बरगी डैम में गुरुवार शाम क्रूज हादसे के बाद जब सरसी आईलैंड की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की गई, तो कई खामियां सामने आईं। यहां किसी भी प्रकार का रेस्क्यू दल मौजूद नहीं है। यदि कोई नाव दुर्घटना का शिकार होती है, तो तत्काल बचाव के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।

सरसी आईलैंड तक पहुंचने के लिए तीन प्रमुख बोटिंग प्वाइंट हैं इटमा (करीब 7 किलोमीटर), मार्कण्डेय (करीब 4 किलोमीटर) और सबसे नजदीकी काढ़े प्वाइंट (2 से 2.5 किलोमीटर)। आपात स्थिति में पुलिस को भी मौके तक पहुंचने में समय लग सकता है।

पपौंध पुलिस के अनुसार, किसी हादसे की स्थिति में उन्हें भी वहां मौजूद नावों का सहारा लेना पड़ता है, क्योंकि विभाग के पास न तो खुद की नाव है और न ही प्रशिक्षित तैराक।

नाव चालक ही निभा रहे बचाव की भूमिका

सरसी आईलैंड के मैनेजर अंकित उपाध्याय ने बताया कि उनके पास कुल 5 नावें हैं, जिनमें एक वाटर स्कूटर, तीन छोटी नावें (चार से पांच लोगों की क्षमता) और एक ‘जलपरी’ नाव है, जिसमें 18 पर्यटक बैठ सकते हैं।

उन्होंने दावा किया कि बिना लाइफ जैकेट किसी को नाव में नहीं बैठाया जाता और एक नाव हमेशा स्टैंडबाय रखी जाती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कोई अलग रेस्क्यू टीम नहीं है और नाव चालक ही तैराक के रूप में कार्य करते हैं, जिनकी संख्या पांच है।

खराब मौसम में रोकी गई थी बोटिंग

अंकित उपाध्याय ने बताया कि गुरुवार शाम मौसम खराब होने के कारण बोटिंग बंद कर दी गई थी। उस समय केवल एक गेस्ट रूम में ठहरा हुआ था। शुक्रवार सुबह से बोटिंग दोबारा शुरू की गई।

रेस्क्यू टीम की दूरी बनी चुनौती

एसडीईआरएफ के प्रभारी कोमल सिंह ने बताया कि उनके पास 8 सदस्यीय रेस्क्यू टीम है, लेकिन उनका मुख्यालय शहडोल में होने के कारण सरसी आईलैंड तक पहुंचने में समय लगता है। यह दूरी करीब 125 किलोमीटर है, जिससे आपात स्थिति में तत्काल सहायता पहुंचाना मुश्किल हो सकता है।

Shreya News
Author: Shreya News

Leave a Comment

READ MORE

READ MORE

Join Us