श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- इंदौर। शहर में हर ओर रामभक्त हनुमान अलग-अलग स्वरूप में विराजित हैं। इनमें बालक से लेकर 71 फीट का महाबली स्वरूप भी है। उनका हर स्वरूप भक्तों के बीच श्रद्धा का केंद्र है। कहीं उनका 200 फीट की ऊंचाई पर 51 फीट का स्वरूप तो कहीं 108 टन वजनी 71 फीट ऊंची अष्टधातु की सुनहरे रंग की पद्मासन मूर्ति है।
साथ ही ओखलेश्वरधाम में पवनपुत्र के हाथ में शिवलिंग तो उल्टे हनुमान की ख्याति भी देश-दुनिया में है। शहर के पूर्वी क्षेत्र के वैभव नगर में निरालाधाम कई वजह से निराला है। यहां 200 फीट की ऊंचाई पर 51 फीट के बजरंगबली विराजित हैं। मंदिर के हर कोने पर राम नाम लिखा हुआ है।
ध्यान मुद्रा में भगवान की सबसे बड़ी मूर्ति
पवन पुत्र हनुमान की खड़ी मूर्तियां तो कई स्थान पर देखी होंगी लेकिन पितृ पर्वत पर पितरेश्वर हनुमान की ध्यान मुद्रा में सबसे बड़ी मूर्ति है। अष्टधातु की सुनहरी 108 टन वजनी मूर्ति की ऊंचाई 71 फीट बताई जाती है। इसके निर्माण में सात वर्ष का समय लगा था।
यहां नौ टन वजनी गदा और छतरी भी लगी है। इस पर 108 बार राम नाम लिखा हुआ है। पितरेश्वरधाम के महेश दलोद्रा ने बताया कि जयंती पर सुबह 11:30 बजे आरती होगी। दिनभर महाप्रसादी वितरण होगा फिर शाम सात बजे महाआरती होगी।
हाथों में द्रोणागिरी पर्वत नहीं बल्कि शिवलिंग
इंदौर से 45 किलोमीटर दूर स्थित ओखलेश्वर धाम में बजरंगबली की साढ़े नौ फीट की मूर्ति स्थापित है, जहां ज्यादातर मूर्तियों के हाथ में द्रोणागिरी पर्वत होता है वहीं यहां शिवलिंग है। यह एक ही पत्थर पर बनी मूर्ति है। शहर के समीप सांवेर में विश्व प्रसिद्ध उल्टे हनुमान भी हैं। इसका निर्माण देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रेरणा से मल्हारराव होलकर ने कराया था। इस मंदिर के पीछे कथा है कि हनुमान सांवेर के रावेर से उल्टे होकर पाताल लोक गए थे।







