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रीवा के यूट्यूबर को एमपी हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, ब्राह्मण समाज की युवतियों पर कमेंट करते हुए वीडियो किए थे वायरल

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  श्रेया न्यूज़ द्रोपती धुर्वे शहडोल :-     जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे की एकलपीठ ने ब्राह्मण समाज की युवतियों के विरुद्ध आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करने वाले रीवा के यूट्यूबर मनीष कुमार पटेल की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी है। आरोपित के विरुद्ध रीवा के सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज है।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन के पैनल अधिवक्ता रघुवर प्रजापति और आपत्तिकर्ता के अधिवक्ता अनिल तिवारी ने पक्ष रखा। अदालत को बताया गया कि मनीष पर पूर्व में चोरी के पांच मामले दर्ज हैं। आपराधिक रिकॉर्ड और गंभीर आरोपों को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी को राहत देने से इन्कार कर दिया।

हाई कोर्ट ने अतिथि व्याख्याता की सेवा समाप्ति पर लगाई रोक, नोटिस जारी कर मांगा जवाब

हाई कोर्ट के न्यायामूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने अतिथि व्याख्याता की सेवा समाप्ति के आदेश को प्रथमदृष्ट्या अनुचित पाया। अंतरिम राहत बतौर सेवा समाप्ति पर रोक लगाते हुए राज्य शासन व अन्य से जवाब तलब कर लिया। याचिकाकर्ता सिहोरा निवासी विमलेश खंपरिया की ओर से अधिवक्ता सत्येंद्र ज्योतिषी व अभिषेक मिश्रा ने पक्ष रखा।

दलील दी कि याचिकाकर्ता की अतिथि व्याख्याता के रूप में नियुक्ति लोक शिक्षण विभाग, भोपाल के द्वारा आनलाइन आवेदन के जरिए हुई थी। मैरिट के आधार पर शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, बहोरीबंद, कटनी के लिए 26 जुलाई, 2025 को चयन हुआ था। इसके बावजूद प्राचार्य द्वारा दुर्भावनापूर्ण तरीके से आवेदिका को मानसिक रूप प्रताड़ित किया जा रहा था।

प्राचार्य द्वारा फोटो खींचने, वीडियो बनवाने सहित अन्य तरीकों से परेशान किया जा रहा था। जिसकी शिकायत डीईओ, कटनी, आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल को भी की गई थी। जांच के भी आदेश जारी हुए थे। इसके बावजूद प्राचार्य द्वारा आठ नवंबर, 2025 को मनमाने तरीके से सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया गया।

भूमि विवाद में सिविल सूट लंबित तो नहीं कर सकते आपराधिक कार्रवाई

मप्र हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विनय सराफ की एकलपीठ ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि जब जमीन विवाद को लेकर सिविल कोर्ट में मामला लंबित हो, तो उसी प्रकरण में समानांतर रूप से आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती। आदेश के साथ ही न्यायालय ने याचिकाकर्ता के विरुद्ध एसडीएम न्यायालय गोरखपुर में चल रही कार्रवाई को निरस्त कर दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता भूपेंद्र सिंह रक्का की ओर से अधि. केके पांडे ने दलील दी कि उन्होंने अनावेदक बलविंदर सिंह के खिलाफ संपत्ति विवाद में सिविल सूट दायर किया था, कोर्ट ने उनके पक्ष में अंतरिम निषेधाज्ञा भी जारी की थी। इसके बावजूद अनावेदक ने एसडीएम गोरखपुर के समक्ष दंड प्रक्रिया के तहत कार्रवाई प्रारंभ करा दी। अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए इसे विधि विरुद्ध बताया।

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Author: Shreya News

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