श्रेया न्यूज़ नीलू राठौर शहडोल :- जबलपुर जिला अस्पताल में ओमनी कार में छोटी एंबुलेंस से काम चल रहा है जो पुरानी हो चुकी है और इसमें पूरे संसाधन नहीं है। इस आधुनिक दौर में जब मरीज की संख्या तेजी से बढ़ रही है उसके पास फुली लोडेड एंबुलेंस नहीं है। पुरानी होने के कारण आधी दूरी तय करने के बाद अनेक बार एंबुलेंस का दम फूल जाता है।
जबलपुर। लाखों की आबादी वाले शहर के मध्य स्थापित आजादी के पूर्व से संचालित जिला अस्पताल विक्टोरिया की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है। प्राथमिक और आपात स्थिति में मरीज सबसे पहले जिस जिला अस्पताल के पास पहुंचते हैं, उसके पास मरीज को तत्काल उपचार स्थल तक पहुंचाने उपयोग में काम आने वाली एंबुलेंस सेवा काफी खराब स्थिति में है।
ओमनी कार में छोटी एंबुलेंस से काम चल रहा है जो पुरानी हो चुकी है और इसमें पूरे संसाधन नहीं है। इस आधुनिक दौर में जब मरीज की संख्या तेजी से बढ़ रही है उसके पास फुली लोडेड एंबुलेंस नहीं है। पुरानी होने के कारण आधी दूरी तय करने के बाद अनेक बार एंबुलेंस का दम फूल जाता है।साथ ही पूरी रफ्तार से यह वाहन नहीं चल पाता। वीआईपी ड्यूटी में भी वह कई बार बीच रास्ते पर बंद हो चुकी है। इसके अलावा लंबी दूरी तय करने पर कब गाड़ी बंद हो जाए कोई भरोसा नहीं। ऐसे में बीमार मरीज को कैसे तत्काल राहत मिल सकेगी।
ई-रिक्शा एंबुलेंस सेवा ने भी दम तोड़ा
महत्वपूर्ण है कि कोरोना काल में मरीजों को लाने-ले जाने के लिए जिला अस्पताल विक्टोरिया और रानी दुर्गावती एल्गिन अस्पताल को ई-रिक्शा एंबुलेंस प्रदान की गई थीं। उद्देश्य था कि ऐसी तंग गलियां और रास्ते, जहां बड़ी एंबुलेंस नहीं पहुंच सकती, वहां भी एंबुलेंस पहुंच सके लेकिन जिला अस्पताल को दी गई ई-रिक्शा एंबुलेंस खराबी के बाद महीनों से बंद पड़ी है।ई-रिक्शा की बैटरी खराब हो गई है। नई बैटरी का खर्च तकरीबन 25 हजार बताया जा रहा है। सुधार के इंतजार में धूल खा रही है। इधर रानी दुर्गावती अस्पताल को प्रदान की गई ई-रिक्शा एंबुलेंस चालू स्थिति में तो है। लेकिन प्रयोग ब्लड बैंक से जुड़े कार्यों में हो रहा है।
तीन फुली लोडेड एंबुलेंस और छह नियमित कर्मी चाहिए
अस्पताल को बड़ी फुली लोडेड तीन एंबुलेंस की वर्तमान में जरूरत है और छह नियमित कर्मचारी चाहिए। अभी ओमनी कार में उसकी एंबुलेंस सेवा संचालित हो रही है। एक कर्मचारी नियमित है, जबकि एक रेडक्रास कर्मचारी सेवा दे रहा है। एंबुलेंस सेवा खराब होने के कारण जिला अस्पताल 108 की सेवाएं लेता है जो कि अनेक बार समय पर मरीज तक नहीं पहुंचती जिससे उसकी जान जोखिम में पड़ जाती है।
108 एंबुलेंस सेवा की मदद लेने पड़ती है
निश्चित रूप से छोटी एंबुलेंस से काम नहीं बनेगा, फुली लोडेड तीन एंबुलेंस की डिमांड की है। कर्मचारी की संख्या भी सीमित है, आपात स्थिति में 108 एंबुलेंस सेवा की मदद लेने पड़ती है। कई बार ये देरी से आने पर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। – डॉ. नवीन कोठारी सिविल सर्जन,जिला अस्पताल







