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पुलिस की रेड से बच्चा छोड़ भागी महिला, एसडीपीओ ने भूख से बिलख रहे मासूम को पिलाया दूध

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  श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :-    दतिया जिले में अवैध शराब के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के दौरान एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने कठोर प्रशासनिक कदमों के बीच मानवीय संवेदनाओं को भी उजागर कर दिया। कानून का पालन कराते हुए जब पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने दतिया के चिरुला थानांतर्गत फुलरा कंजर डेरा इलाके में छापा मारा, तो वहां अफरा-तफरी मच गई।

दतिया। दतिया जिले में अवैध शराब के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के दौरान एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने कठोर प्रशासनिक कदमों के बीच मानवीय संवेदनाओं को भी उजागर कर दिया। कानून का पालन कराते हुए जब पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने दतिया के चिरुला थानांतर्गत फुलरा कंजर डेरा इलाके में छापा मारा, तो वहां अफरा-तफरी मच गई। कार्रवाई की भनक लगते ही शराब बनाने में लगे कंजर डेरा के महिला पुरुष अपने घर को छोड़कर भाग निकले, लेकिन पीछे छूट गए नन्हे-नन्हे मासूम, जो उस वक्त भूख, ठंड के बीच डरे हुए थे।

25 जनवरी को हुई इस कार्रवाई के दौरान जब पुलिस ने डेरा के घरों की तलाशी ली, तो एक मकान में तीन छोटे बच्चे और एक महज तीन महीने का शिशु मिला। दो बच्चों की उम्र करीब चार से पांच साल थी, जबकि 10 साल की एक बच्ची अपने छोटे भाई-बहनों को संभालने की पूरी कोशिश कर रही थी। इस सबके बीच डेरे से भागते समय एक महिला वहां अपने तीन माह के नन्हे शिशु को छोड़ गई। वह मासूम बेहद कम कपड़ों में ठंड से कांप रहा था और भूखा होने के कारण लगातार रो रहा था। उसकी मासूम चीखें माहौल को और भी भारी बना रही थीं।

बच्चों की हालत देखकर मौके पर मौजूद एसडीओपी आकांक्षा जैन का दिल पसीज गया। उन्हें बच्चे भूख और ठंड से बेहद परेशान दिखे। हालात की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने बिना एक पल गंवाए दूध और गर्म कपड़ों की व्यवस्था करवाई। महिला पुलिस अफसर ने खुद उस तीन महीने के शिशु को गोद में उठाया, बोतल से दूध पिलाया और उसे गर्म कपड़ों में लपेट लिया। जब तक बच्चा शांत होकर सो नहीं गया, तब तक वह उसे अपने पास ही रखे रहीं। साथ ही घर की छत पर धूप में लेकर भी गई।

डेरा निवासी 10 साल की बच्ची और 70 वर्षीय वृद्ध ने पुलिस को बताया कि बच्चे की मां कार्रवाई के दौरान वहां से चली गई है और वह अकेले ही सबको संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन छोटे शिशु की देखभाल उसके लिए मुश्किल हो रही थी। बाद में एसडीओपी आकांक्षा जैन ने शिशु को उसी बच्ची को सौंपा और भरोसा दिलाया कि किसी भी परेशानी में तुरंत पुलिस को सूचना दी जाए। अवैध शराब के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बीच सामने आई यह घटना पुलिस की मानवीय सोच और संवेदनशील चेहरे को दिखाती है। यह याद दिलाती है कि वर्दी के पीछे भी एक दिल धड़कता है, जो मासूमों की पीड़ा देखकर कानून से आगे बढ़कर इंसानियत का फर्ज निभाना जानता है।

वापस लौटे स्वजन

इस मामले में एसडीओपी जैन ने बताया कि कार्रवाई के दौरान डरकर भागे महिला व पुरुष वापस घर लौट आए हैं, जो अपने परिवार और बच्चों के साथ ही मौजूद बताए जाते हैं।

 

Shreya News
Author: Shreya News

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