श्रेया न्यूज़ शहडोल सीमा सिंह :- जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सटे पुटपुरा गांव में 16 जनवरी को हुई एक बाघिन की दर्दनाक मौत ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था और खेतों में इस्तेमाल होने वाली सुरक्षा तकनीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बाघिन की मौत खेत में लगाए गए झटका मशीन के तार की चपेट में आने से हुई, जो न सिर्फ घटिया गुणवत्ता की थी बल्कि सुरक्षा मानकों पर भी खरी नहीं उतरी।
जांच के दौरान एक और गंभीर लापरवाही सामने आई है। खेत मालिक द्वारा लगाया गया सुरक्षा अलार्म उस समय बंद था, जिससे किसी को समय रहते घटना की जानकारी नहीं मिल सकी। यदि अलार्म चालू होता तो शायद बाघिन की जान बचाई जा सकती थी। इस लापरवाही को वन विभाग ने गंभीर अपराध मानते हुए खेत मालिक बी.डी. सिंह के खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल आरोपी की तबीयत खराब होने के कारण उसे इलाज के लिए जबलपुर में भर्ती कराया गया है।
यह मामला सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा। बाघिन की मौत को राज्य स्तर पर भी गंभीरता से लिया गया है। वन मुख्यालय भोपाल ने घटना का संज्ञान लेते हुए बुधवार को टाइगर सेल की एक विशेष बैठक बुलाई है। इस बैठक की अध्यक्षता वाइल्ड लाइफ वार्डन करेंगे, जिसमें पुलिस विभाग, ऊर्जा विभाग, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
बीटीआर के उपनिदेशक पी.के. वर्मा ने बताया कि झटका मशीन के कारण बाघिन की मौत का यह पहला मामला है। उन्होंने कहा कि बैठक में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि भविष्य में खेतों में लगाई जाने वाली झटका मशीनों की गुणवत्ता, तकनीकी मानक और निगरानी व्यवस्था को लेकर कड़े नियम बनाए जाएंगे, ताकि मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को रोका जा सके।







