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निर्दोष बैंक मैनेजर 14 महीने जेल में रहा:हाईकोर्ट ने आरोपों से किया बरी, इज्जत के साथ नौकरी भी गई; दोस्तों ने की थी साजिश

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श्रेया न्यूज़ शहडोल सीमा सिंह :-        ” मेरी जिंदगी शानदार चल रही थी। मैं एक प्राइवेट बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर था। पत्नी एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थीं, जहां हमारे बच्चे भी पढ़ते थे। पापा पुलिस से रिटायर होकर गांव में सैटल थे। बड़ी बहन भी पुलिस में हैं। सब कुछ ठीक था, लेकिन एक ही दिन में मेरी दुनिया उजड़ गई।

ये कहते हुए रायसेन जिले के अभिनव दुबे की आवाज लड़खड़ा जाती है। वे आगे बताते हैं, मुझे धोखाधड़ी के एक झूठे मामले में 7 साल की जेल हो गई। पत्नी की नौकरी छूट गई और उसे बच्चों के साथ अपने माता-पिता के घर जाना पड़ा। मैंने अपनी बाइक और गोल्ड लोन की किस्तें नहीं चुकाई, तो वे नीलाम हो गईं।

लगभग डेढ़ साल जेल में बिताने के बाद आज हाईकोर्ट ने मुझे निर्दोष तो साबित कर दिया है, लेकिन इस बेगुनाही की मैंने बहुत भारी कीमत चुकाई है। आखिर क्या हुआ था अभिनव के साथ? कोर्ट ने किस आधार पर अभिनव को रिहा किया।

जानिए आखिर मामला क्या था?

अभिनव नरसिंहपुर स्थित आईसीआईसीआई बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर (आरएम) के पद पर था, जहां उसका मुख्य काम किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जारी करना था। साल 2016 में उनके सहकर्मी सुमित ठाकुर ने उनसे संपर्क किया। सुमित ने बताया कि उसके दोस्त राम लोधी को अपनी 5 एकड़ जमीन पर लोन के लिए तत्काल केसीसी की जरूरत है।

अभिनव ने प्रक्रिया के अनुसार सभी जरूरी दस्तावेज लाने को कहा। सुमित ने जमीन के कागजात, पटवारी और ग्राम सचिव के हस्ताक्षर, आधार कार्ड और पैन कार्ड समेत सभी फाइलें तैयार की।

बैंक की इंटरनल प्रोसेस और दस्तावेजों के आधार पर फाइल को आगे बढ़ा दिया गया। लोन देने से पहले होने वाले फिजिकल वैरिफिकेशन में भी सब कुछ सही पाया गया।
अब जानिए कैसे अभिनव साजिश का शिकार हुआ

तीन साल बाद… जब पुलिस घर आई

लोन स्वीकृत हो गया और सुमित के दोस्तों को पैसे मिल गए। समय बीतता गया और अभिनव यह मामला भूल भी गए। तीन साल बाद 2019 में, नरसिंहपुर के कोतवाली थाने में एक केस दर्ज हुआ। यह केस शुगर बाई ने दर्ज कराया था, जिसकी जमीन पर 2016 में लोन लिया गया था।

शिकायत में कहा गया था कि राम लोधी और बैंक मैनेजर ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनकी जमीन पर 5,69,000 का लोन स्वीकृत कराकर आपस में बांट लिया। अभिनव बताते हैं, जैसे ही मैंने पुलिस स्टेशन में लोन की फाइल देखी और शिकायत करने वाली महिला को देखा, मेरी आंखें फटी रह गईं। मेरे साथ एक बहुत बड़ा षड्यंत्र हुआ था।

कागजों में हेराफेरी, जिंदा इंसान का नाम बदल दिया

जांच में जो सामने आया, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। दरअसल, सुमित ठाकुर और उसके दो दोस्तों, यश शर्मा और प्रदीप लोधी पर कुछ लाख रुपए का कर्ज था। कर्ज चुकाने के लिए उन्हें पैसों की सख्त जरूरत थी। इसी दौरान उनके हाथ कहीं से शुगर बाई की 5 एकड़ जमीन की असली बही लग गई।
क्योंकि सुमित बैंक में काम करता था और फिजिकल वैरिफिकेशन प्रक्रिया को अच्छी तरह समझता था, उसने एक योजना बनाई। बही पर मालिक का नाम राम लोधी (शुगर बाई के पति) था।

सुमित ने अपने दोस्त यश शर्मा को ही ‘राम लोधी’ बना दिया। यश शर्मा की तस्वीर का इस्तेमाल करके राम लोधी के नाम से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और सरपंच का प्रमाण पत्र तैयार किया गया।

सब्जी का ठेला लगाने वाली को बना दिया पत्नी

हैरानी की बात यह थी कि इस पूरे फर्जीवाड़े में सरकारी तंत्र भी शामिल हो गया। सरपंच और ग्राम सचिव ने भी बिना जांच-पड़ताल के उन जाली दस्तावेजों को सत्यापित कर दिया, जिस पर तस्वीर यश शर्मा की थी और नाम राम लोधी का था। इस साजिश में एक और महिला, बबली नोरिया को भी शामिल किया गया, जो सब्जी का ठेला लगाती थी। उसे कुछ पैसों का लालच देकर लोन लेते समय फर्जी राम लोधी (यश शर्मा) की पत्नी बनाया गया था।

पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस का ध्यान स्वाभाविक रूप से उस व्यक्ति पर गया, जिसने लोन फाइल को प्रोसेस किया था – यानी अभिनव दुबे। शुरुआती पूछताछ में एसडीओपी ने अभिनव को यह कहते हुए क्लीन चिट दे दी कि सत्यापन और फोटो लेने की जिम्मेदारी दूसरों की थी, लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं हुई।

मुख्य साजिशकर्ता सुमित ठाकुर और यश शर्मा ने पहले ही अग्रिम जमानत ले ली और फरार हो गए। पुलिस ने सारा दबाव अभिनव पर बना दिया। आखिरकार पुलिस ने अभिनव को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें लगभग एक महीने तक जेल में रहना पड़ा, जिसके बाद उन्हें जमानत मिली।
कोर्ट का फैसला- साजिश करने वाले बरी हो गए

जमानत पर बाहर आने के बाद सालों तक केस चलता रहा। अभिनव को उम्मीद थी कि सच्चाई सामने आएगी और वे बरी हो जाएंगे। लेकिन 29 मई, 2024 को जिला अदालत का जो फैसला आया, उसने उनकी बची-खुची उम्मीदों को भी तोड़ दिया। फैसले में कई चौंकाने वाली बातें थीं-

पटवारी, सरपंच और सचिव, जिन्होंने जाली दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे, उनके नाम चार्जशीट से हटा दिए गए थे।

मुख्य साजिशकर्ता सुमित लोधी, यश शर्मा और बबली नोरिया को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

अभिनव दुबे को दोषी ठहराया गया और 7 साल की सश्रम कारावास की सजा सुना दी गई।

इस दोषसिद्धि का आधार सिर्फ एक हैंडराइटिंग विश्लेषण था। चार्जशीट में लिखा था कि हैंडराइटिंग एक्सपर्ट के अनुसार, “संभावना है कि फाइल पर मौजूद 3-4 हस्ताक्षर अभिनव के हों।” यह रिपोर्ट न केवल अस्पष्ट थी, बल्कि इसके लिए अभिनव के हस्ताक्षर का नमूना भी चार्जशीट दाखिल होने के बाद बिना कोर्ट की अनुमति के लिया गया था, जो कानूनी रूप से अवैध था।
हाईकोर्ट ने सभी आरोपों से बरी किया

सजा के बाद अभिनव का परिवार टूट चुका था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर की। उनके वकील मनोज चतुर्वेदी ने अदालत के सामने कुछ ठोस तर्क रखेः

अभिनव कभी भी मूल पीड़ित यानी शुगर बाई से नहीं मिले थे।

दस्तावेजों का सत्यापन केवल आरएम की जिम्मेदारी नहीं थी। इसमें क्रेडिट टीम (जबलपुर) और तहसीलदार भी शामिल थे, जिन्होंने आधिकारिक बही पर हस्ताक्षर किए थे।

सबसे अहम दलील यह थी कि यदि सरपंच और तहसीलदार जैसे सरकारी अधिकारी, जिनका काम ही भूमि रिकॉर्ड को सत्यापित करना है, एक जाली फोटो से धोखा खा सकते हैं, तो एक निजी बैंक के कर्मचारी को अकेले कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?

14 महीने जेल में रहने की कीमत चुकाई अभिनव

इन तर्कों को सुनने के बाद, 18 नवंबर को हाईकोर्ट ने जिला अदालत के फैसले को पलटते हुए अभिनव को सभी दोषों से बरी कर दिया। कोर्ट ने माना कि हैंडराइटिंग रिपोर्ट अत्यधिक संदिग्ध और अविश्वसनीय थी और अभिनव के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं था। हालांकि इस पूरे मामले की एक बड़ी कीमत अभिनव को चुकाना पड़ी है।
अभिनव कहते हैं कि मेरी नौकरी चली गई, पत्नी को नौकरी को छोड़कर माता-पिता के घर जाना पड़ा। गोल्ड लोन और बाइक की ईएमआई न चुका पाने के कारण वे नीलाम हो गईं। सबसे बड़ा नुकसान उनके सिबिल स्कोर को हुआ, जो पूरी तरह से खराब हो गया। अब वित्त और बैंकिंग के क्षेत्र में उनके लिए नौकरी के दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैI

इन सवालों का जवाब मिलना बाकी

अभिनव को कोर्ट ने बरी कर दिया, लेकिन कुछ सवालों का जवाब मिलना बाकी है।

बैंक द्वारा स्वीकृत किया गया लोन का पैसा आखिर किसने लिया?

क्या असली धोखेबाज, जो आज आजाद घूम रहे हैं, कभी पकड़े जाएंगे?

पुलिस ने इस मामले की जांच में जो गंभीर खामियां छोड़ीं, उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?

Shreya News
Author: Shreya News

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