श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- घुनघुटी वन परिक्षेत्र में करीब पांच वर्षीय तेंदुए का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। शुरुआती तौर पर टाइगर के साथ संघर्ष में मौत होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लगे वनांचल में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घुनघुटी वन परिक्षेत्र के जंगल में करीब पांच वर्षीय तेंदुए का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। आरएफ 233 के अमहाई धार नाला के समीप मिले शव की खबर सामने आते ही वन विभाग का अमला सक्रिय हो गया। शुरुआती तौर पर तेंदुए की मौत टाइगर के साथ संघर्ष में होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन मौत के पीछे की वास्तविक वजह अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में जंगल के भीतर हुई इस घटना ने कई सवालों को जन्म दे दिया है।
जानकारी के अनुसार, घुनघुटी वन परिक्षेत्र अंतर्गत आरएफ 233 अमहाई धार नाला के समीप तेंदुए का शव मिलने की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारियों में हलचल तेज हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ विवेक सिंह, एसडीओ दिगेंद्र सिंह पटेल और रेंजर हरीश तिवारी सहित वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल का निरीक्षण कर परिस्थितियों की जांच शुरू की गई। जांच में डॉग स्क्वॉड की भी मदद ली जा रही है, ताकि घटना से जुड़े संभावित साक्ष्यों का पता लगाया जा सके।
तेंदुए की मौत को लेकर प्रारंभिक आशंका टाइगर के साथ संघर्ष की जताई जा रही है। हालांकि, अभी तक ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, जिससे मौत की वजह को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में बाघ और तेंदुए जैसे शिकारी जीवों के बीच क्षेत्र और शिकार को लेकर संघर्ष की स्थिति बन सकती है, लेकिन इस मामले में वास्तविक कारण जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा। सवाल यह भी है कि क्या घटनास्थल पर मिले साक्ष्य आपसी संघर्ष की ओर इशारा करते हैं या जांच के दौरान कोई दूसरा पहलू सामने आएगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं।
वन विभाग की चुप्पी से बढ़ा सस्पें
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
फिलहाल घुनघुटी के जंगल में मिले तेंदुए के शव ने वन विभाग के सामने जांच की चुनौती खड़ी कर दी है। मौत का कारण सामने आने के बाद ही इस रहस्यमयी घटना से पर्दा उठ सकेगा।












