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करोड़ों के गबन पर बड़ी कार्रवाई, तत्कालीन बीईओ अशोक शर्मा की सेवा समाप्त

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श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- मध्य प्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग ने शहडोल जिले के बुढार के तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) अशोक कुमार शर्मा की शासकीय सेवा समाप्त कर दी है। विभाग द्वारा 23 जून 2026 को जारी आदेश में यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं और करोड़ों रुपये के गबन से जुड़े मामले में की गई है।

1 करोड़ से अधिक राशि के गबन का आरोप

जारी आदेश के अनुसार अशोक कुमार शर्मा, जो मूल रूप से व्याख्याता पद पर पदस्थ थे, ने वर्ष 2014 से 2020 के बीच बुढार क्षेत्र में विभिन्न बैंक खातों का संचालन करते हुए करीब 1 करोड़ 1 लाख 72 हजार 176 रुपये का गबन किया। मामला सामने आने के बाद उनके खिलाफ बुढार थाने में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद वर्ष 2021 में उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

मामला पहुंचा अदालत, सुप्रीम कोर्ट तक हुई सुनवाई

यह मामला न्यायालय तक पहुंचा, जहां प्रारंभिक स्तर पर एफआईआर से संबंधित कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। हालांकि बाद में राज्य शासन ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एफआईआर केवल अपराध की सूचना होती है और आरोपों की जांच आवश्यक है। इसके बाद विभागीय कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।

सात आरोपों का जारी हुआ था आरोप पत्र

शहडोल संभाग के आयुक्त द्वारा वर्ष 2021 में अशोक शर्मा के खिलाफ सात आरोपों का आरोप पत्र जारी किया गया था। विभागीय जांच में उन पर कई बैंक खाते खोलने और उनका संचालन कर गंभीर वित्तीय अनियमितताएं करने के आरोपों की जांच की गई। जांच प्रतिवेदन और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद शासन ने आरोपों को गंभीर माना।

शासन ने सेवा के लिए अनुपयुक्त माना

जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर शासन ने अशोक कुमार शर्मा को शासकीय सेवा के लिए अनुपयुक्त माना। जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अशोक कुमार शर्मा को मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत “पदच्युत” किए जाने का दंड दिया जाता है।

विभाग में बड़ा प्रशासनिक संदेश

विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कदम के रूप में देखी जा रही है। शासन का मानना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही तय करना आवश्यक है। इस कार्रवाई को जनजातीय कार्य विभाग में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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Author: Shreya News

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