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विश्व सिकल सेल दिवस: धार जिला सिकल सेल नियंत्रण में प्रदेश के अग्रणी जिलों में, फिर भी 83 मरीज उपचार से बाहर

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श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :-  धार। आदिवासी बहुल धार जिला सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ चल रही लड़ाई में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार जिले ने सिकल सेल मरीजों के उपचार में 94.35 प्रतिशत उपलब्धि हासिल कर प्रदेश में पांचवां स्थान प्राप्त किया है। जिले में चिन्हित 3476 सिकल सेल रोगियों में से 3393 मरीज उपचार प्राप्त कर रहे हैं, जबकि मात्र 83 मरीज अभी भी उपचार की मुख्यधारा से बाहर हैं।

आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि जिले के कई विकासखंडों ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल की है। बदनावर में 107 प्रतिशत, नालछा में 106 प्रतिशत, तिरला में 104 प्रतिशत, धार शहरी क्षेत्र में 102 प्रतिशत तथा कुक्षी में 101 प्रतिशत उपचार उपलब्धि दर्ज की गई है। डही और गंधवानी ने शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। ये उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और मरीजों की बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है।

हालांकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी सुधार की आवश्यकता है। धार ग्रामीण में केवल 83 प्रतिशत मरीज ही उपचार प्राप्त कर रहे हैं, जहां 18 मरीजों में से 3 उपचार से वंचित हैं। उमरबन में 371 रोगियों में से 40 तथा मनावर में 621 रोगियों में से 39 मरीज उपचार नहीं ले रहे हैं। यह अंतर बताता है कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में अब भी नियमित फालोअप और जागरूकता बढ़ाने की जरुरत है।
गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग में भी अच्छा प्रदर्शन

एक अप्रैल से 25 मई 2026 के बीच जिले में पंजीकृत 7026 गर्भवती महिलाओं में से 6381 महिलाओं की सिकल सेल जांच की गई, जो 91 प्रतिशत उपलब्धि है। जांच के दौरान 104 महिलाओं में सिकल सेल ट्रेट तथा 10 महिलाओं में सिकल सेल रोग की पुष्टि हुई।

ब्लॉकवार स्थिति

ब्लॉकवार प्रदर्शन में बदनावर 99 प्रतिशत, धार शहरी 97 प्रतिशत और धरमपुरी 96 प्रतिशत स्क्रीनिंग के साथ अग्रणी रहे। वहीं तिरला में केवल 70 प्रतिशत तथा गंधवानी में 83 प्रतिशत स्क्रीनिंग हुई, जो चिंता का विषय है। तिरला में 80 और गंधवानी में 72 गर्भवती महिलाओं की जांच अभी शेष है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच भविष्य की पीढ़ियों को सिकल सेल रोग से बचाने की दिशा में सबसे प्रभावी कदम है। यदि विवाह से पूर्व और गर्भावस्था के दौरान जांच को व्यापक रुप से अपनाया जाए तो आने वाले वर्षों में इस बीमारी के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

जागरुकता बनी सबसे बड़ी ताकत

धार, झाबुआ, अलीराजपुर और बड़वानी जैसे आदिवासी जिलों में सिकल सेल एनीमिया लंबे समय से एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्क्रीनिंग, उपचार और परामर्श सेवाओं के विस्तार से स्थिति में सुधार दिखाई दे रहा है। जिले की उपलब्धियां इस बात का संकेत हैं कि सही रणनीति और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से इस अनुवांशिक बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

क्या है सिकल सेल बीमारी?

सिकल सेल एनीमिया एक अनुवांशिक (वंशानुगत) रक्त रोग है, जिसमें लाल रक्त कण (आरबीसी) सामान्य गोल आकार के बजाय हंसिया (सिकल) जैसे टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं। इससे शरीर में आक्सीजन का प्रवाह बाधित होता है और मरीज को खून की कमी, असहनीय दर्द, कमजोरी, बार-बार संक्रमण तथा अंगों को नुकसान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि माता और पिता दोनों सिकल सेल ट्रेट (वाहक) हों तो बच्चे में सिकल सेल रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए विवाह पूर्व तथा गर्भावस्था में सिकल सेल जांच कराना जरुरी माना जाता है। समय पर जांच, परामर्श और नियमित उपचार से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।

Shreya News
Author: Shreya News

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